पटना : बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड (बीएसईबी) के परीक्षा परिणामों का विवाद से पुराना नाता है. इस वर्ष भी इंटरमीडिएट की परीक्षा के अंकपत्रों में हुई गड़बड़ियां बोर्ड की किरकिरी का कारण बनी हैं. पिछले कुछ दिनों से विद्यार्थी बिहार बोर्ड के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं. तमाम विरोध के बीच बिहार बोर्ड ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अंक पत्र की जांच के लिए विद्यार्थियों को समय दिया है. बीएसईबी ने शनिवार को कहा कि छात्रों को 16 जून तक अपनी उत्तर पुस्तिका की जांच का मौका दिया जाएगा. अंकपत्र की जांच के बाद यदि विनियमितता प्रकाश में आती है, तो ऐसे मामलों में अंक बढ़ाए या घटाए जा सकते हैं. गौरतलब है  कि बीएसईबी ने यह फैसला पिछले कुछ दिनों से इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों के विरोध एवं धरने को देखते हुए लिया है. Also Read - IPL 2020: सचिन तेंदुलकर ने युवा ओपनर रुतुराज गायकवाड़ को लेकर की भविष्वाणी, बोले-वह तो लंबी...

अंकतालिका के नाम पर थमाया कोरा कागज
कई विद्यार्थी का तो यह तक कहना है कि उन्होंने जेईई और नीट जैसी प्रतियोगिता परीक्षाएं पास कर ली हैं लेकिन इंटरमीडिएट में कम अंक आने की वजह से काउंसेलिंग से उन्हें रोका जा सकता है. कुछ ऐसे भी विद्यार्थी हैं जिन्हें बोर्ड ने प्रत्येक विषय में शून्य दिया है तो कुछ को प्राप्त अंकपत्र में विषय का नाम तो अंकित है लेकिन उसके सामने बोर्ड अंक लिखना ही भूल गया. 06 जून को रिजल्ट निकलने के साथ ही विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में बोर्ड कार्यालय पहुंच कर विरोध शुरू कर दिया था और गेट भी तोड़ दिया था. भाजपा के वरिष्ठ सांसद सी पी ठाकुर सहित कई अन्य नेताओं ने इसकी कड़ी आलोचना की है. ठाकुर ने कहा कि बिहार में परीक्षा तंत्र अब भी खस्ताहाल है. Also Read - Sonagachi: सोनागाछी के सेक्स वर्कर हुए बेहाल, महामारी से बढ़ी मुश्किलें

विद्यार्थियों का यह भी कहना है कि जो इंटरमीडिएट की परीक्षा दूसरी बार दे रहे थे उन्हें पिछली अंकतालिका ही थमा दी गयी है. बहरहाल परीक्षार्थियों के पिछले वर्ष जितना अंक आने या कुल अंक से ज्यादा अंक प्राप्त करने के मीडिया में आए कई मामलों का हवाला देते हुए बीएसइबी ने स्पष्ट किया कि यह उन्हीं उम्मीदवारों का है जिन्होंने अंक सुधारने के लिए इस बार फिर से परीक्षा दी थी. देखना यह है कि बीएसईबी अंकतालिका की जांच के बाद क्या कार्रवाई करती है जिससे छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न हो. यह कोई पहली बार नहीं है कि बिहार बोर्ड के लचर रवैय्ये का खामियाजा छात्रों को उठाना पड़ रहा है. Also Read - Sonagachi: सबसे बड़ा Red Light Area है बंगाल का सोनागाछी, जानें क्या है इसके बनने की कहानी