नई दिल्ली: बिहार में 11 मार्च को लोकसभा की एक और विधानसभा की दो सीटों के लिए उपचुनाव होने जा रहा है. यह चुनाव बीजेपी-जेडीयू गठबंधन के लिए पहली चुनावी परीक्षा की तरह होगा. जेल में बंद आरजे़डी प्रमुख लालू प्रसाद ने अगले आम चुनाव से पहले अपनी पार्टी की शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदल दिया है. चुनाव विश्लेषकों का कहना है कि इनमें से दो सीटें – अररिया संसदीय सीट और जहानाबाद विधानसभा सीट खासतौर पर महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वहां आरजेडी का तथाकथित मुस्लिम-यादव (एमवाई) गणित मजबूत है लेकिन जेडीयू और बीजेपी के मतदाताओं के पारंपरिक रूप से साथ आने से उनके उम्मीदवारों को लाभ मिल सकता है.Also Read - सुना है कि बीजेपी अपने 150 MLA के टिकट काटने जा रही... हमने 300 सीटों को पार कर लिया: अखिलेश यादव

दोनों सीटें आरजे़डी के खाते में थीं और मोहम्मद तस्लीमुद्दीन (2014 में अररिया से लोकसभा चुनाव जीतने वाले नेता) तथा जहानाबाद के विधायक मुंद्रिका यादव के निधन से उपचुनाव की जरूरत पड़ी. 2014 में बीजेपी से दूरी बनाने के बाद जेडीयू ने अकेले लोकसभा चुनाव लड़ा था और मोदी लहर होने के बावजूद तस्लीमुद्दीन चुनाव जीतने में सफर रहे थे. उन्हें 41 प्रतिशत वोट मिले थे और बीजेपी एवं जेडीयू का मत प्रतिशत जोड़ा जाए तो वह 50 प्रतिशत था. Also Read - UP कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान का चेहरा होंगी प्रियंका गांधी, सपा, बसपा पिछड़ीं: पीएल पुनिया

अररिया लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता कुल मतदाताओं के 41 प्रतिशत से ज्यादा हैं और जेडीयू के अपने पाले में आने के बाद बीजेपी हिंदू मतों के लामबंद होने की उम्मीद कर रही है. Also Read - Maharashtra: नांदेड़ से तीन बार सांसद रह चुके भास्‍करराव खतगांवकर ने BJP छोड़ी, कांग्रेस में वापस लौटे

एनडीए सूत्रों ने कहा कि 2004 और 2009 के चुनावों में जब जेडीयू एनडीए का हिस्सा था. सीट पर बीजेपी उम्मीदवारों को जीत मिली थी. 2009 में चुनाव जीतने वाले बीजेपी उम्मीदवार प्रदीप कुमार सिंह दोबारा चुनाव मैदान में हैं और आरजे़डी के उम्मीदवार सरफराज आलम से भिड़ेंगे. आलम तस्लीमुद्दीन के बेटे हैं.

जहानाबाद में यादव और भूमिहार सबसे बड़े जाति समूह हैं और आमतौर पर वे विरोधी दलों का समर्थन करते रहे हैं. दलित आरजे़डी या जेडीयू किसी के भी पक्ष में संतुलन झुका सकते हैं. 2010 में जेडीयू ने एनडीए का हिस्सा रहते हुए यहां से जीत हासिल की थी और उसके उम्मीदवार की जीत नीतीश के लिए मनोबल बढ़ाने वाली होगी.

बीजेपी ने तत्कालीन आरजे़डी-जेडीयू-कांग्रेस महागठबंधन के पक्ष में जनसमर्थन के बीच 2015 में भभुआ विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी और उसे पूरा यकीन है कि वह विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के साथ मुकाबले में सीट बरकरार रखने में सफल होगी.

बता दें बिहार की अररिया लोकसभा सीट यहां से आरजेडी सांसद रहे मोहम्मद तस्लीमुद्दीन, जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र से आरजेडी विधायक मुंद्रिका सिंह यादव और भभुआ विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक आनंद भूषण पांडेय के निधन के कारण खाली हुई है.

बीजेपी ने दिवंगत विधायक आनंद भूषण की पत्नी रिंकी यादव को भभुआ से और अररिया से प्रदीप सिंह को पार्टी का उम्मीदवार बनाया है. एनडीए में शामिल हुई जेडीयू ने जहानाबाद से अभिराम शर्मा को उम्मीदवार घोषित किया है. वहीं आरजेडी ने अररिया से तस्लीमुद्दीन के पुत्र सरफराज आलम को और जहानाबाद से अपने दिवंगत विधायक मुंद्रिका सिंह यादव के पुत्र सुदय यादव को उम्मीदवार बनाया है.

(भाषा इनपुट के साथ)