नई दिल्ली. बिहार में लोकसभा की एक और विधानसभा की दो सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. प्रदेश में अररिया लोकसभा क्षेत्र और भभुआ व जहानाबाद विधानसभा सीटों के लिए 11 मार्च को उपचुनाव होने हैं. चुनाव के नतीजे 14 मार्च को आएंगे. अररिया विधानसभा सीट राजद सांसद तस्लीमुद्दीन के निधन के बाद खाली हुई है. वहीं, जहानाबाद विधानसभा सीट राजद के विधायक मुंद्रिका सिंह यादव और भभुआ सीट भाजपा के विधायक आनंद भूषण पांडेय के देहांत के बाद खाली हुई है. इन तीनों क्षेत्रों में चुनाव को लेकर प्रदेश में सत्तारूढ़ राजग और विपक्षी राजद-कांग्रेस ने तैयारियां तेज कर दी हैं. एक तरफ जहां विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष व राजद के नेता तेजस्वी यादव विपक्षी दलों का झंडा बुलंद किए हुए हैं, वहीं सत्तारूढ़ एनडीए लोकसभा के साथ-साथ दोनों विधानसभाओं पर भी अपना कब्जा करने की जुगत में लगा हुआ है.Also Read - Bihar विधानसभा परिसर में मिलीं शराब की बोतलें, नीतीश कुमार ने तेजस्‍वी यादव के सवाल का दिया ये जवाब

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बिहार में हो रहे उपचुनावों में सबसे ज्यादा ध्यान अगर किसी क्षेत्र का है तो वह अररिया लोकसभा क्षेत्र ही है. यहां से राजद के नेता तस्लीमुद्दीन सांसद थे, जिनके निधन के बाद यह सीट खाली हुई है. यहां से राजद ने पूर्व सांसद के बेटे सरफराज आलम को अपना प्रत्याशी बनाया है. आलम के लिए राजद के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव जोर-शोर से चुनाव प्रचार में जुटे हैं. वे अपनी ‘संविधान बचाओ यात्रा’ के जरिए प्रदेश में सत्तारूढ़ नीतीश कुमार और केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ लगातार हमला बोल रहे हैं. बीते दिनों यहां के कुर्साकांटा प्रखंड में चुनाव प्रचार करते हुए तेजस्वी ने कहा कि यह चुनाव देश में 2019 में होनेवाले लोकसभा चुनाव की दशा और दिशा तय करेगा. तेजस्वी के अलावा राजद और कांग्रेस के कई नेता आने वाले दिनों में अररिया पहुंचने वाले हैं. इधर, एनडीए की तरफ से यहां पूर्व में चुनाव जीत चुके प्रदीप सिंह प्रत्याशी हैं. उनके पक्ष में प्रदेश सरकार के मंत्री और अन्य कई भाजपा नेता चुनाव प्रचार के लिए पहुंच रहे हैं. एनडीए के चुनाव प्रचारक उत्तर-पूर्व में हुए ताजा विधानसभा चुनाव के नतीजों के आधार पर जनता से वोट मांगते हुए भाजपा की विकास की नीतियों को आधार बना रहे हैं. बीते दिनों प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय ने यहां चुनाव प्रचार के दौरान कहा भी था कि भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर उत्तर-पूर्व के लोगों ने वहां पार्टी की सरकार बनाई. अब अररिया की जनता भी भाजपा के ऊपर भरोसा जताएगी.

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जहानाबाद का हालः जदयू और राजद में तीखी होगी जंग

जहानाबाद से पूर्व विधायक मुंद्रिका सिंह यादव के पुत्र सुदय यादव राजद के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं, उपचुनाव न लड़ने के एलान के बाद इस सीट पर जदयू ने अपने उम्मीदवार के रूप में अभिराम शर्मा को उम्मीदवार बनाया है. शर्मा बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ब्रह्मर्षि समाज से आते हैं. यह क्षेत्र मगध कहलाता है, जहां से अभी जदयू के सिर्फ दो अगड़ी जाति के विधायक हैं. ऐसे में जदयू इस सीट को जीतने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहता है. यह वजह है कि जहानाबाद सीट के उपचुनाव की मॉनिटरिंग प्रदेश मुख्यालय से की जा रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा कई अन्य नेता इसी हफ्ते में यहां चुनाव प्रचार करने के लिए आने वाले हैं. उधर, राजद के लिए जहानाबाद सीटिंग सीट रही है, इसलिए पार्टी नहीं चाहती कि उपचुनाव में यह सीट उसके हाथ से खिसक जाए. राजद ने जहानाबाद सहित प्रदेश के अन्य दो उपचुनाव वाले क्षेत्रों के लिए वाररूम बनाया है. इस सीट पर राजद को जीतन राम मांझी के ‘हम’ का भी साथ मिला है, जो बीते दिनों ही राजद के साथ आए हैं. ‘हम’ के नेता भी राजद के लिए जहानाबाद में चुनाव प्रचार में जुट गए हैं.

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भभुआ का हालः भाजपा से सीट छीनने के प्रयास में जुटा महागठबंधन

भभुआ विधानसभा सीट भाजपा की रही है. यहां के विधायक आनंद भूषण पांडेय के निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है. लिहाजा महागठबंधन के नेताओं का प्रयास है कि किसी भी तरह यह सीट भाजपा के कब्जे से छीन ली जाए. इसके लिए राजद और कांग्रेस ने मिली-जुली रणनीति बनाई है. इस सीट पर कांग्रेस की ओर से शंभू सिंह पटेल चुनाव लड़ रहे हैं. बीते दिनों हुई दोनों पार्टियों की बैठक में तय हुआ कि भभुआ सीट के लिए दोनों ही दलों के नेता चुनाव प्रचार करेंगे. इनमें पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, तेजस्वी यादव, जगदानंद सिंह, शरद यादव, जीतनराम मांझी, आलोक मेहता आदि प्रमुख हैं. प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के.एल. शर्मा भभुआ में कैंप कर रहे हैं. वहीं, भाजपा ने इस सीट से रिंकी रानी पांडेय को अपना उम्मीदवार बनाया है. पार्टी के पक्ष में प्रदेश के मंत्री और विधान पार्षद चुनाव प्रचार कर रहे हैं. भभुआ के स्थानीय पत्रकार बताते हैं कि दोनों ही दलों से चुनाव मैदान में उतारे गए प्रत्याशी नए हैं. इसलिए चुनाव का रुझान किस ओर जाएगा, यह कहना मुश्किल हो रहा है.