नई दिल्ली. बिहार के मुजफ्फरपुर समेत कई अन्य जिलों में फैले चमकी बुखार या एईएस (Acute Encephalitis Syndrome) से लगातार हो रही मौत का आंकड़ा थमा नहीं है. गुरुवार को एईएस से पीड़ित बच्चों की मौत की संख्या 117 पर पहुंच गई. इनमें से 98 बच्चों की मौत जहां मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) में हुई है, वहीं 19 अन्य बच्चों ने यहीं के केजरीवाल अस्पताल में दम तोड़ दिया. हालांकि स्थानीय अखबारों की खबरों के मुताबिक अभी तक चमकी बुखार से पीड़ित 125 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई है. इधर, SKMCH प्रशासन ने अस्पताल में एईएस पीड़ित बच्चों की बढ़ती संख्या को देख वैकल्पिक इंतजाम किए हैं. अस्पताल ने कैदी वार्ड को तात्कालिक रूप से आईसीयू (ICU) यानी गहन चिकित्सा कक्ष में बदल दिया है. यहां पर भर्ती कैदियों को दूसरे वार्डों में भेज दिया गया है.

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इधर, एईएस के प्रसार को रोकने के राज्य सरकार के तमाम दावों के बावजूद इस बीमारी ने नए इलाकों में पैर पसारने शुरू कर दिए हैं. मुजफ्फरपुर से प्रकाशित हिंदी अखबार हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक जहां एईएस का कहर मुजफ्फरपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और शिवहर जिले में था, वहीं बुधवार को समस्तीपुर, भागलपुर और बेगूसराय इलाके में भी इस बीमारी से पीड़ित बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने की खबरें आई हैं. अखबार की खबर के मुताबिक भागलपुर के मायागंज अस्पताल में एईएस से पीड़ित 3 बच्चों की मौत हुई है. नवगछिया के एक अस्पताल में भी एईएस पीड़ित बच्चे को भर्ती कराने की खबर है. वहीं बेगूसराय सदर अस्पताल में भी बुधवार को ऐसे पांच बच्चों को भर्ती कराया गया, जिनके एईएस से पीड़ित होने की आशंका है.

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मुजफ्फरपुर से ही प्रकाशित एक अन्य अखबार दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में एईएस से बच्चों की मौत की संख्या ने पिछले कुछ वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. अखबार के मुताबिक, वर्ष 2012 में जहां एईएस से पीड़ित 336 बच्चों को मुजफ्फरपुर और अन्य जिलों के अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, वहीं इस साल अभी तक 473 बच्चों को ये बीमारी अपनी चपेट में ले चुकी है. अखबार ने लिखा है कि 2012 में 300 से ज्यादा बच्चे इस बीमारी की चपेट में आए थे, जिनमें से 120 बच्चों की मौत हो गई थी. अखबार ने 2019 में चमकी बुखार की वजह से 125 बच्चों की मौत का आंकड़ा देते हुए लिखा है कि इस बार की स्थिति और भयावह हो गई है.

इधर, एसकेएमसी अस्पताल प्रशासन ने चमकी बुखार की वजह से बीमार पड़े बच्चों की देखरेख के लिए अस्पताल में वैकल्पिक इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं. इसके तहत गुरुवार को अस्पताल में बने कैदी वार्ड को आईसीयू में बदल दिया गया. इस वार्ड में इलाजरत कैदियों को अन्य वार्डों में शिफ्ट कर दिया गया है. अस्पताल के मैनेजर ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए कैदी वार्ड को आईसीयू में बदला गया है. यह जल्द ही काम करना शुरू कर देगा. इस वार्ड को आईसीयू बनाए जाने के बाद अस्पताल में 19 और बेड बढ़ जाएंगे, जिस पर एईएस पीड़ित बच्चों को भर्ती किया जा सकेगा.