पटना. लोकसभा चुनावों के बाद सरकार और मंत्रिमंडल गठन से राजग के अंदर, भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के बीच बनी ‘गांठ’ अब भी सुलझती नजर नहीं आ रही है. यही वजह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का भाजपा ‘विरोधी रवैया’ अब भी कम नहीं हुआ है. पहले तो बिहार सरकार के मंत्रिमंडल में सिर्फ जदयू के नेताओं को शामिल करना और अब अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day 2019) के मौके पर नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का योगाभ्यास से दूरी बनाना, सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है.

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बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार को पांचवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (Yoga Day) के मौके पर कई स्थानों पर योग शिविर आयोजित किए गए. इनमें भाजपा नेता और डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी समेत जदयू के भी कई नेताओं ने शिरकत की, लेकिन नीतीश कुमार (Nitish Kumar) इन कार्यक्रमों से दूर रहे. जब इस बाबत जदयू के नेताओं से पूछा गया तो उनका जवाब था कि सीएम नीतीश कुमार योग के हिमायती हैं, लेकिन इसके राजनीतिक प्रचार का विरोध करते हैं.

बिहार सरकार में शामिल भाजपा और जदयू के कई मंत्रियों और नेताओं ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day 2019) के मौके पर पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुए मुख्य कार्यक्रम में भाग लिया. मगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसमें नहीं गए. राज्य में सत्तारूढ़ राजग नेता राज्यभर में आयोजित अन्य कार्यक्रमों में आम लोगों के साथ शामिल हुए. इसको लेकर जब सीएम कार्यालय से पूछा गया तो जवाब मिला कि मुख्यमंत्री योग दिवस (Yoga Day) में भाग नहीं लेंगे. मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा, “नीतीश कुमार योग दिवस समारोह में भाग नहीं ले रहे हैं.”

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योग दिवस के कार्यक्रम में नीतीश कुमार के शामिल न होने को लेकर जब जदयू के नेताओं से बात की गई, तब भी कुछ ऐसा ही जवाब मिला. जदयू के नेताओं ने कहा कि उनकी पार्टी के अध्यक्ष हर सुबह योग करते हैं और इसके प्रचार के भी पुरजोर समर्थक हैं. लेकिन राजनीतिक प्रचार के लिए योग के इस्तेमाल का विरोध करते हैं. योग दिवस के कार्यक्रम में शामिल न होने को लेकर जदयू की तरफ से आया यह जवाब, बिहार के ताजा राजनीतिक हालात को बयां करता है.

(इनपुट – एजेंसी)