Bihar News: बिहार में विधानसभा का चुनाव होने में कुछ ही महीने बाकी हैं और ऐसे में राज्य की नीतीश सरकार हर तरफ से बाजी अपने हाथ में करना चाहती है. चुनाव से पहले राज्य सरकार को शिक्षकों की याद आई है और वह नियोजित शिक्षकों को अब मनाने में जुट गई है. इसकी शुरूआत कुछ इस तरह हो रही है कि सबसे पहले ‘नियोजित शिक्षक’ शब्द को ही हटाया जाएगा. Also Read - लालू के लाल तेजप्रताप को सबक सिखाने को तैयार ऐश्वर्या राय, ससुर भी बखिया उधेड़ेंगे

बिहार में सरकारी शिक्षकों पर मेहरबान होने की तैयारी कर रही राज्य सरकार जल्द ही शिक्षकों की कई लंबित मांगे भी पूरी करने वाली हैं. जल्द ही बिहार सरकार नियोजित शिक्षक शब्द को हटाने का एलान करेगी और इन शिक्षकों के लिए बनी सेवा शर्त को लागू करने की भी घोषणा करने जा रही है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 5 सितम्बर तक जहां शिक्षकों को सेवा शर्त का सरकार तोहफा देने जा रही है, वहीं 15 अगस्त को सीएम नीतीश कुमार ‘नियोजित शिक्षक’ शब्द हटाने का बड़ा ऐलान भी कर सकते हैं. Also Read - बिहार के कद्दावर नेता शरद यादव की हालत नाजुक, गंगाराम अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखे गए

इस सेवा शर्त लागू होते ही राज्य के पौने चार लाख प्रारम्भिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक स्कूल के शिक्षक राज्यभर में कहीं भी अपना ट्रांसफर करवा सकेंगे. साथ ही सरकार शिक्षकों को पहली बार ईपीएफ और प्रोमोशन का भी लाभ देने जा रही है. शिक्षा विभाग ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है. इसके बाद सरकार अनुकम्पा के इंतजार में बैठे आश्रितों को भी बड़ा लाभ देने जा रही है. इसके तहत जो भी टीईटी, बीएड ट्रेंड अभ्यर्थी होंगे उन्हें भी नौकरी मिलेगी जबकि अनट्रेंड अभ्यर्थियों को भी डिग्री के आधार पर क्लर्क और फोर्थ ग्रेड कर्मचारी में बहाली की जाएगी. Also Read - एक और सुशांत... फिर बिहार के एक बॉलीवुड एक्टर ने मुंबई स्थित फ्लैट में लगा ली फांसी, वजह वही

बता दें कि वर्षों से बिहार के नियोजित शिक्षक समान काम के लिए समान वेतनमान समेत विभिन्न सेवा शर्त की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन समान वेतनमान मामले में पहले ही सरकार ने बजट का हवाला देते हुए पहले ही अपना पल्ला झाड़ लिया था, लेकिन अब बिहार में चुनाव नजदीक हैं तो ऐसे में कहा जा रहा है कि शिक्षकों के बड़े वोट बैंक को देखते हुए नीतीश सरकार बड़ा फैसला ले सकती है.