Corona Virus Lockdown: बिहार में शिक्षा विभाग ने साफ कहा है कि किसी भी हालत में क्लास एक से लेकर क्लास आठ तक के स्कूलों में पढ़ाई की इजाजत अभी हरगिज नहीं दी जाएगी. शिक्षा विभाग के इस फैसले से निजी स्कूलों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि स्कूल बंद होने की वजह से निजी स्कूलों को खासा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है. Also Read - दिल्ली HC ने दिया आदेश-ऑनलाइन क्लासेज के लिए छात्रों को दें मोबाइल-लैपटॉप, इंटरनेट पैक

निजी स्कूलों की परेशानी के पीछे तर्क यह है कि पढ़ाई भले ही न हो रही हो लेकिन दूसरी गतिविधियां स्कूलों में जारी है. इसके साथ ही जो भी टीचिंग या नॉन टीचिंग स्टाफ हैं, उन्हें तो वेतन देना ही पड़ता है. ऐसे में सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए. Also Read - बिहार के 3.5 लाख शिक्षकों के लिए खुशखबरी, अब सबका होगा यूनिवर्सल अकाउंट नंबर

पटना बोर्ड कॉलोनी डीएवी स्कूल के प्रिंसिपल वी एस ओझा के मुताबिक, स्कूल में पढ़ाई नहीं हो रही है, लेकिन टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफों की संख्या बहुत ज्यादा है और उन्हें वेतन हर हाल में देना है. वहीं, छात्रों का कहना है कि पांच महीने का अरसा बहुत ज्यादा होता है, अब घर में मन नहीं लगता है. क्लास की तुलना ऑनलाइन क्लास से कभी नहीं हो सकती है. Also Read - School Fee Notice: सिर्फ ट्यूशन फीस ले सकेंगे निजी स्कूल, एक्स्ट्रा शुल्क वसूलने पर होगी कार्रवाई

दरअसल, केन्द्र सरकार ने लॉकडाउन के बाद अनलॉक की प्रक्रिया शुरू की जिसमें तमाम तरह की रियायतें दी गईं हैं इसलिए स्कूलों में भी पढ़ाई की अनुमति दी जा सकती है. कम से कम नौ और उसके बाद की क्लास तो शुरू की जा सकती है. क्योंकि क्लास नौ या उससे बड़े स्कूली छात्रों की इम्यूनिटी मजबूत होती है. लेकिन शिक्षा विभाग किसी भी तरह के जोखिम के लिए तैयार नहीं है.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जब तक कोरोना वैक्सीन का टेस्टेड वैक्सीन सामने नहीं आता है, तब तक कम से कम क्लास एक से क्लास आठ तक के स्कूलों में पढ़ाई तो शुरू नहीं ही होगी, भले यह साल निकल जाए.

बिहार के प्राथमिक शिक्षा विभाग के निदेशक रणजीत कुमार सिंह के मुताबिक, छोटे बच्चों और बुजुर्गों को कोरोना संक्रमण का खतरा ज्यादा है. स्कूल खुलने की हालत में बच्चे जब घर पहुंचेंगे तो आशंका है कि पूरा परिवार ही कोरोना संक्रमित हो जाए. लिहाजा ये जोखिम नहीं ले सकते हैं.