Bihar Assembly Elections 2020: लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) अपने बिहार के नेताओं के साथ आज एक महत्वपूर्ण बैठक कर रही है. इसमें यह तय किया जाएगा कि आगामी राज्य विधानसभा चुनाव जेडीयू (JDU) के खिलाफ लड़ा जाए या नहीं? हाल के समय में बिहार में सत्ताधारी राजग के दोनों घटक दलों में रिश्ते बिगड़े हैं. बैठक की पूर्व संध्या पर LJP अध्यक्ष चिराग पासवान ने JDU अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish kumar) पर फिर निशाना साधा. चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने कहा कि मारे गए अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के लोगों के परिजन को सरकारी नौकरी देने का उनका फैसला ‘और कुछ नहीं, बल्कि चुनाव संबंधी घोषणा’ है.Also Read - Bihar: JDU नेता डॉ. राजीव कुमार सिंह और उनकी पत्नी खुशबू सिंह पर जिम ट्रेनर की हत्‍या की कोशिश का केस दर्ज

बिहार के मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में उन्होंने कुमार पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों से पूर्व में किये गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया. इन वादों में उन्हें तीन डिसमिल जमीन दिये जाने का भी जिक्र था. लोजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘नीतीश कुमार की सरकार अगर गंभीर थी’, तो समुदाय के उन सभी लोगों के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देनी चाहिए थी, जो उनके 15 साल के शासन के दौरान मारे गए.’ Also Read - बिहार सीएम नीतीश ने की टीकाकरण महाअभियान की शुरूआत, खुद लिखकर दी पीएम को जन्मदिन की बधाई

राम विलास पासवान की पार्टी लोजपा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता वाले जनता दल (यूनाइटेड) बीते कुछ महीनों से एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं. कुमार के पूर्व मुख्यमंत्री और दलित नेता जीतन राम मांझी से हाथ मिलाने के बाद दोनों दलों के रिश्तों में खटास और बढ़ गई है. मांझी लोजपा पर निशाना साधते रहे हैं. Also Read - LJP सांसद प्रिंस राज पर बलात्कार के आरोप में मामला दर्ज, FIR में चिराग पासवान का भी नाम; जानें पूरा मामला...

कुमार पर निशाना साधने के दौरान चिराग पासवान भाजपा पर निशाना साधने से बचते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना भी करते हैं. केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान की पार्टी की कमान अब उनके बेटे चिराग पासवान संभाल रहे हैं. सूत्रों ने कहा कि पार्टी के पास एक विकल्प यह है कि वह केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले राजग का हिस्सा बनी रहे, लेकिन राज्य में उससे अलग होकर चुनाव लड़े जबकि भगवा दल के खिलाफ उम्मीदवार न उतारे.

LJP फरवरी 2005 में हुए बिहार विधानसभा के चुनावों में RJD के खिलाफ चुनाव लड़ी थी, जबकि दोनों क्षेत्रीय दल केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार का हिस्सा थे. लोजपा ने कांग्रेस से अपना गठबंधन बरकरार रखते हुए राजद के खिलाफ उम्मीदवार उतारे थे. इसकी वजह से राज्य में किसी को भी बहुमत नहीं मिला जिससे लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद का 15 साल का शासन बिहार में खत्म हुआ और कुछ महीनों बाद एक अन्य विधानसभा चुनाव हुआ जिसमें नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला जद (यू) और भाजपा गठबंधन बहुमत के साथ सत्ता में आया.

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत तमाम पार्टी नेता राजग के तीनों घटकों के साथ मिलकर आगामी चुनाव लड़ने पर जोर दे रहे हैं, लेकिन सूत्रों ने कहा कि असहजता का भाव आ रहा है क्योंकि नीतीश कुमार राजद के नेताओं को अपने पाले में करने की कोशिश करके और मांझी से गठजोड़ कर अपनी स्थिति को मजबूत कर रहे हैं. जद (यू) ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह लोजपा के साथ सीटों की साझेदारी को लेकर कोई बात नहीं करेगी, क्योंकि उसके संबंध परंपरागत रूप से भाजपा के साथ हैं. निर्वाचन आयोग के जल्द ही बिहार विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा करने की उम्मीद है. प्रदेश में विधानसभा की 243 सीटों पर अक्टूबर-नवंबर में चुनाव होने की उम्मीद है.

(इनपुट: भाषा)