नई दिल्ली. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र का सोमवार को दिल्ली में निधन हो गया. वे 82 वर्ष के थे. मिश्र के परिजनों के मुताबिक वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उनका दिल्ली में इलाज चल रहा था. इलाज के दौरान ही सोमवार की सुबह उन्होंने अंतिम सांसें ली. उनके निधन की खबर बिहार पहुंचने के बाद पूरे राज्य में शोक की लहर व्याप्त हो गई है. देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के लिए कभी बिहार में डॉ. मिश्र प्रमुख चेहरा माने जाते थे. बिहार के अंतिम कांग्रेसी मुख्यमंत्री के रूप में भी जगन्नाथ मिश्र का ही नाम लिया जाता है. सियासी गलियारों में उन्हें डॉ. मिश्र के नाम से ही जाना पहचाना गया.

डॉ. मिश्र की पहचान बिहार की राजनीति में दिग्गज नेता के रूप में होती थी. बिहार के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके मिश्र की बचपन से ही राजनीति में रुचि थी. उन्होंने कॉलेज के प्रोफेसर के रूप में अपना करियर प्रारंभ किया परंतु इसके बाद वे राजनीति में आ गए और कांग्रेस में शामिल हो गए. अर्थशास्त्र के शिक्षक होने के नाते डॉ. मिश्र ने कई किताबें भी लिखी थीं. हाल ही में उनकी लिखी एक किताब का विमोचन भी किया गया था. डॉ. मिश्र केंद्रीय मंत्री का भी दायित्व संभल चुके थे. राजनीति के कई दशक कांग्रेस में बिताने के बाद डॉ. मिश्र अपने जीवन के अंतिम समय में जनता दल (युनाइटेड) में शामिल हो गए थे.

डॉ. जगन्नाथ मिश्र के सीएम पद से हटने के बाद कांग्रेस बिहार में अब तक सत्ता से बाहर ही है. सियासी जानकार यहां तक कहते हैं कि डॉ. मिश्र के बाद कांग्रेस पार्टी को उनके कद का या पूरे राज्य में असर छोड़ने वाला कोई नेता नहीं मिल सका. 1990 में लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद सत्ता से बाहर हुई कांग्रेस पार्टी, अभी तक बाहर ही है. अलबत्ता, राजनीतिक जोड़-तोड़ या अन्य तिकड़मों से जरूर पार्टी को सत्ताधारी दल के साथ बने रहने का इक्का-दुक्का मौका मिलता रहा है.