नई दिल्ली. बिहार सरकार ने बेटियों की शिक्षा, उनका समय से पहले विवाह रोकने और लड़कियों के समग्र विकास के लिए अनूठी स्कीम लॉन्च कर दी है. सरकार ने बाल विवाह को रोकने के लिए फैसला किया है कि अब प्रदेश में किसी भी लड़की को इंटरमीडिएट पास करने के बाद 10 हजार रुपए दिए जाएंगे. लेकिन शर्त ये रहेगी कि लड़की अविवाहित होनी चाहिए. इसी तरह ग्रेजुएशन करने के बाद सरकार लड़की को 25 हजार रुपए देगी. हालांकि ग्रेजुएशन में लड़की के शादीशुदा होने या न होने जैसी शर्त नहीं रखी गई है. बिहार सरकार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने गुरुवार को कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार की इस योजना की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह योजना इसी महीने से लागू कर दी जाएगी. यही नहीं, बेटियों के जन्म पर भी सरकार उनके माता-पिता को निर्धारित राशि देगी.

प्रदेश की 1 करोड़ 60 लाख बेटियों को लाभ
मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि सरकार की इस योजना का लाभ तात्कालिक रूप से प्रदेश की 1 करोड़ 60 लाख लड़कियों को मिलेगा. वहीं योजना के तहत लड़कियों पर हर साल करीब 2221 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. इस योजना के तहत एक परिवार की दो बच्चियों को ही इस योजना का लाभ मिल सकेगा. उन्होंने यह भी बताया कि कुल मिलाकर देखें तो जन्म से स्नातक की पढ़ाई करने तक सरकार एक लड़की पर 54 हजार 100 रुपए खर्च करेगी. मुख्य सचिव ने यह भी बताया कि बाल विवाह रोकने और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने यह इंतजाम किया है. इसमें लड़कियों के लिए पहले से चल रही पोशाक योजना और साइकिल योजना शामिल नहीं है.

लड़की के जन्म पर माता-पिता को मिलेंगे 2 हजार
लड़कियों के उत्थान से संबंधित योजना के बारे में बिहार सरकार के मुख्य सचिव ने मीडिया को विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि नई योजना का उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या रोकना, लड़कियों का जन्म निबंधन और पूर्ण टीकाकरण, लिंग अनुपात में बढ़ोतरी, बालिका शिक्षा में वृद्धि, आत्मनिर्भरता बढ़ाना, बाल विवाह पर अंकुश लगाना आदि है. उन्होंने बताया कि लड़कियों के जन्म पर सरकार उनके माता-पिता के बैंक खाते में 2 हजार रुपए जमा करेगी. एक वर्ष की उम्र में उसका आधार लिंक होने पर 1 हजार रुपए और टीकाकरण पूरा होने पर 2 हजार रुपए दिए जाएंगे. उन्होंने बताया कि पोशाक योजना, साइकिल योजना और छात्रवृत्ति योजना से प्रदेश के स्कूलों में काफी हद तक लड़के-लड़कियों का अनुपात ठीक हो गया है.

तेजाब पीड़ितों के लिए भी पेंशन की व्यवस्था
बिहार सरकार ने तेजाब हमलों की पीड़िताओं के लिए भी इंतजाम किए हैं. मुख्य सचिव ने कैबिनेट की मीटिंग के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में अब तेजाब पीड़ित को भी निःशक्तता पेंशन योजना का लाभ मिलेगा. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों के शिकार हुए लोगों को सरकार हर महीने 400 रुपए पेंशन देगी. इसके लिए सरकार ने दिव्यांग पेंशन पाने की अर्हता के नियम में भी बदलाव किया है. मुख्य सचिव ने बताया कि दिव्यांगता की न्यूनतम अर्हता को 40 प्रतिशत की शर्त पर विलोपित कर दिया गया है. उन्होंने यह जानकारी भी दी कि अभी लड़कियों से जुड़ी योजनाओं पर सालाना 840 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं. नई योजना के लागू होने के बाद हर साल करीब 2200 करोड़ रुपए खर्च होंगे. इससे सरकार पर 1400 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.

लंगर के खाने में प्रयुक्त खाद्य सामग्री को जीएसटी से मुक्त रखा जाए : नीतीश कुमार

लंगर के खाने में प्रयुक्त खाद्य सामग्री को जीएसटी से मुक्त रखा जाए : नीतीश कुमार

पोशाक राशि में भी सरकार ने की बढ़ोतरी
बिहार सरकार ने लड़कियों को दी जाने वाली पोशाक राशि में भी बढ़ोतरी कर दी है. बिहार में कक्षावार लड़कियों को पोशाक राशि का भुगतान किया जाता है. सरकार ने सभी कक्षाओं की लड़कियों के लिए निर्धारित पोशाक राशि बढ़ा दी है. सरकार के नए निर्देशों के अनुसार पहली और दूसरी कक्षा की लड़कियों को पहले पोशाक राशि के लिए 400 रुपए मिलते थे, यह राशि अब बढ़ाकर 600 रुपए कर दी जाएगी. इसी तरह तीसरी से पांचवीं कक्षा तक की लड़कियों को पोशाक के लिए पहले 500 रुपए दिए जाते थे, जो अब बढ़ाकर 700 रुपए हो जाएगा. छठी से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़कियों को पहले 700 रुपए मिलते थे, लेकिन अब उन्हें 1 हजार रुपए मिलेंगे. इसी तरह नौवीं से 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़कियों को पोशाक के लिए पहले जहां 1 हजार रुपए मिलते थे, वह अब बढ़कर 1500 रुपए हो जाएंगे.