पटना. दो महीने में चमकी बुखार यानी एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (Acute Encephalitis Syndrome) की वजह से 150 से अधिक मासूम बच्चों की मौत के बाद आखिरकार बिहार सरकार को महसूस हो गया है कि इस खतरनाक बीमारी का कारण कुपोषण है. मीडिया रिपोर्टों, सामाजिक कार्यकर्ताओं की आवाजों और डॉक्टरों की सलाह यूं तो कई महीनों से सरकार को इस बात की इत्तला कर रही थी कि चमकी बुखार के पीछे कुपोषण ही सबसे बड़ी वजह है. लेकिन सरकार के मंत्री या आला अधिकारी चुप्पी साधे रहे. बहरहाल, देर से ही सही बिहार की नीतीश कुमार (Nitish Kumar) सरकार ने अब प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ अभियान चलाने का फैसला कर लिया है. हालांकि समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार एईएस से अब तक 131 बच्चों की मौत की आधिकारिक पुष्टि ही की गई है. Also Read - बिहार के मुख्यमंत्री को जान मारने की धमकी, 25 लाख रुपये का रखा इनाम

चमकी बुखार: बिहार में बच्चों पर कहर बनकर टूट रही ये बीमारी, जानिए कारण और लक्षण?

चमकी बुखार: बिहार में बच्चों पर कहर बनकर टूट रही ये बीमारी, जानिए कारण और लक्षण?

बिहार के मुजफ्फरपुर सहित करीब 20 जिलों में एईएस या चमकी बुखार से 150 से ज्यादा बच्चों की मौत का मुख्य कारण कुपोषण और गरीबी माना जा रहा है. इन बच्चों की मौत के बाद सरकार अब बच्चों को कुपोषण से निजात दिलाने के लिए अभियान शुरू करने जा रही है. समाज कल्याण विभाग के तहत कार्यरत समेकित बाल विकास सेवाएं (आइसीडीएस) निदेशलय को और मजबूत कर सभी 38 जिलों के सभी 534 प्रखंडों में पोषण अभियान को जरूरतमंदों तक पहुंचाने का निर्णय लिया है. आरोप है कि बिहार के कई जिलों में आंगनबाड़ी केंद्र महीने में 10 दिन काम नहीं करते. Also Read - Covid-19: प्रशांत किशोर ने शेयर किया लॉकअप में बंद मजदूरों का वीडियो, मांगा नीतीश का इस्तीफा

निदेशालय के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि बिहार में पोषण अभियान को गति देने के लिए प्रखंड समन्वयक तैनात होंगे. इनके साथ ही प्रखंड परियोजना सहायक भी नियुक्त किए जाएंगे. अधिकारी का कहना है कि प्रत्येक केंद्र में एक सेलफोन दिया जाएगा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अपनी रोज की गतिविधियों को रजिस्टर पर खनापूर्ति करने के बजाय एप में अपलोड करना होगा. सेलफोन जियो टैग्ड होगा, इसके नए सिस्टम के जरिए आंगनबाड़ी सेंटरों के खुले या बंद होने का पता लगाना आसान होगा. Also Read - बिहार के बाहर फंसे लोगों को दी जाएगी मदद, 100 करोड़ रुपये जारी: नीतीश कुमार

समेकित बाल विकास परियोजना निदेशालय के निदेशक आलोक कुमार कहते हैं कि एप के जरिए न केवल केंद्रों की निगरानी की जा सकेगी बल्कि बच्चे की वृद्धि की भी जांच की जा सकेगी. उन्होंने कहा कि निदेशालय की योजना कुपोषण के विरुद्घ जन जागरूकता का प्रसार करना है तथा छह वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण की दर को वर्तमान की 38.4 फीसदी से 2022 तक 25 फीसदी पर लाने की योजना है.

(इनपुट – एजेंसी)