Bihar Legislative Council Polls 2020: बिहार में विधान परिषद सदस्यों(एमएलसी) की खाली हुई सीटों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को दो टिकट घोषित कर दिए. भाजपा मुख्यालय में राष्ट्रीय मीडिया सह संयोजक की जिम्मेदारी देख रहे डॉ. संजय मयूख को पार्टी ने एक बार फिर विधान परिषद में भेजने की तैयारी की है. वहीं लालू यादव और नीतीश कुमार की पार्टी में काम कर चुके पूर्व मंत्री सम्राट चौधरी को भी भाजपा ने विधान परिषद का टिकट दिया है. बिहार में खाली हुई कुल नौ सीटों पर 6 जुलाई को वोट पड़ेगा.

जातीय समीकरण की बात करें तो बीजेपी ने टिकट देने में कायस्थ और कुशवाहा समीकरण का ध्यान रखा है. डॉ. संजय मयूख, जहां सवर्ण वर्ग में शामिल कायस्थ समाज से आते हैं, वहीं सम्राट चौधरी पिछड़ा वर्ग की कुशवाहा जाति से हैं. यूं तो राज्य में कायस्थों की आबादी दो प्रतिशत से भी कम है, मगर इस जाति का राजनीतिक रसूख कहीं ज्यादा है.

बिहार में ओबीसी समुदाय की कुल आबादी 51 प्रतिशत है. इसमें यादवों और कुर्मी के बाद कुशवाहा(कोइरी) समाज की सबसे ज्यादा भागीदारी है. सम्राट चौधरी को टिकट देकर बीजेपी ने राज्य की करीब 6.4 प्रतिशत कुशवाहा आबादी को साधने की कोशिश की है. इस प्रकार बीजेपी ने एक टिकट सवर्ण तो दूसरा टिकट पिछड़ा वर्ग के नेता को दिया है.

संजय मयूख की बात करें तो वह इससे पहले भी विधान परिषद जा चुके हैं. वर्ष 2017 में उन्हें भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बिहार से दिल्ली बुलाकर राष्ट्रीय मीडिया सह संयोजक की जिम्मेदारी दी थी. इस प्रकार मयूख का कद पार्टी में 2017 से बढ़ना शुरू हुआ. अब दूसरी बार पार्टी ने उन्हें विधान परिषद भेजने की तैयारी की है.

सम्राट चौधरी 2017 में भाजपा में शामिल हुए थे. इससे पहले 1999 में वह राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री तो बाद मे वह जदयू में शामिल होने पर 2014 में जीतन राम मांझी सरकार में शहरी विकास मंत्री बने थे. नीतीश कु्मार से विवाद के बाद जदयू ने निलंबित किया तो वह जीतन राम मांझी के साथ उनकी पार्टी ‘हम’ में चले गए. फिर जून, 2017 में सम्राट चौधरी ने भाजपा का झंडा थाम लिया. भाजपा ने उन्हें 2018 में प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया था. सम्राट चौधरी के पिता शकुनि चौधरी बिहार में कुशवाहा समाज के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शुमार रहे हैं.

(इनपुट-आईएएनएस)