नई दिल्‍ली: नेपाली सुरक्षाबलों की हिरासत से लौटकर सीतामढ़ी आए लगन किशोर ने आज अपनी दर्दभरी दास्‍तां बताई है. बता दें कि नेपाली सीमा सुरक्षा बल के कर्मियों की कल की फायरिंग में 22 साल के एक भारतीय युवक की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए थे और उन्‍होंने एक भारतीय लगन किशोर को हिरासत में ले लिया था, जिसे आज शनिवार को छोड़ दिया है. Also Read - चीन से तनाव के बीच बॉर्डर पर तेजी से इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप कर रहा है भारत, राजनाथ सिंह ने की समीक्षा

सीमामढ़ी आए लगन किशोर ने बताया कि बताया कि जब नेपाली सुरक्षाबलों ने फायरिंग करना शुरू की तो हम भारत की ओर भागने लगे, लेकिन उन्‍होंने मुझे भारत की ओर से खींच लिया. उन्‍होंने मुझे राइफल की बट से पीटा और नेपाल के सारंगपुर ले गए. लगन किशोर ने बताया कि नेपाली सुरक्षाबलों ने मुझसे कहा कि तुम स्‍वीकार करों कि तुम्‍हें हम नेपाल से पकड़कर ले गए हैं. किशोर कहा कि मैंने उन्‍हें कह किया कि आप मुझे मार सकते हो लेकिन मुझे भारत से लाया गया है. Also Read - US Election 2020: डोनाल्ड ट्रंप Vs जो बाइडेन, जानें कौन हैं और क्या है इनका नजरिया, भारत को होगा फायदा या नुकसान?

लगन किशोर ने बताया कि मैं और मेरा बेटा अपनी बहू (जो नेपाल की निवासी है) से मिलने के लिए बॉर्डर पर बैठे थे. नेपाली सुरक्षाबलों ने अपनी तरफ से मेरे बेटे को चोट मारी. जब मैंने उनसे कहा कि वो ऐसा क्‍यों कर रहे हैं तो उन्‍होंने मुझे चुप रहने के लिए कहा. उन्‍होंने 10 से ज्‍यादा सुरक्षाकर्मियों का बुला लिया. वे सीमा पर आए और उन्‍होंने हवा में गोलियां चला दीं.

बता दें कि बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले 45 वर्षीय लगन यादव और अन्य को शुक्रवार को नेपाली बहू से मुलाकात भारी पड़ी थी, क्योंकि नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के कर्मियों ने इस पर आपत्ति जताई, जिससे बाद ग्रामीणों और नेपाली सुरक्षा कर्मियों में झड़प हो गई. इस झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि दो अन्य घायल हो गए है. एपीएफ ने घटना के बाद लगन यादव को हिरासत में ले लिया था. स्थानीय लोगों की सीमा के दोनों ओर रिश्तेदारी है और कोई बाड़ नहीं होने की वजह से लोग सीमा के दोनों ओर रिश्तेदारों से मिलने आते-जाते रहते हैं.