Bihar News Update: लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में चाचा पशुपति कुमार पारस (Pashupati Kumar paras) और भतीजे चिराग पासवान (Chirag Paswan) के बीच बढ़ी दरार से पार्टी में भी घमासान मचा हुआ है. दोनों नेता अब आमने-सामने नजर आ रहे हैं. इस बीच चिराग पासवान ने आज बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) को एक पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने चाचा पारस को लोकसभा में एलजेपी का नेता बनाने पर लोकसभा अध्यक्ष पर नाराजगी जताई है.Also Read - LJP के दोनों धड़ों चिराग पासवान और पशुपति पारस को नए पार्टी नाम के साथ ही चुनाव चिन्ह भी मिले

चिराग ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा कि पशुपति कुमार पारस को लोकसभा में एलजेपी का नेता घोषित करने का निर्णय हमारी पार्टी के संविधान के प्रावधान के खिलाफ है. उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अपने पक्ष में नया सर्कुलर जारी करने का अनुरोध किया है. पत्र में कहा गया कि पार्टी का अध्यक्ष ही संसदीय दल का नेता चुन सकता है. चिराग ने कहा कि उन्हें ही फिर से संसदीय दल का नेता नियुक्त किया जाए. Also Read - चुनाव आयोग ने लोक जनशक्ति पार्टी का चुनाव चिन्ह जब्त किया, चिराग पासवान और पशुपति पारस गुटों के बीच छिड़ी है जंग

मालूम हो कि मंगलवार को पारस ने चिराग को पार्टी अध्यक्ष पद से हटा दिया. इसके बाद चिराग ने बागी सभी पांच सांसदों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. इन घटनाक्रमों के बाद यह तय है कि यह राजनीतिक परिवार की लड़ाई का पटाक्षेप जल्दी नहीं होता दिख रहा है. इधर एलजेपी का दावा है कि अध्यक्ष चिराग पासवान को हटाना इतना आसान नहीं है. दो दिनों से शांत एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी अब अपने तेवर कडे कर लिए हैं. Also Read - चिराग पासवान को एक और झटका, चाचा पशुपति पारस ने सात राज्यों में नियुक्त किए LJP के नए प्रदेश अध्यक्ष

पार्टी प्रवक्ता अशरफ अंसारी कहते हैं, ‘पार्टी संविधान स्पष्ट कहता है कि अध्यक्ष स्वेच्छा से या उसके निधन के बाद ही अध्यक्ष पद से हट सकता है. उन्होंने कहा कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मंगलवार को पांच सांसदों को पार्टी से निकाल दिया गया है. बैठक में कम से कम कार्यकारिणी के 35 से ज्यादा सदस्यों की संख्या की जरूरी थी जबकि बैठक में 40 से अधिक सदस्यों ने भाग लिया’

उन्होंने कहा कि पांचों सासदों को हटाने का प्रस्ताव पार्टी के प्रधान सचिव अब्दुल खलिक ने लाया और सर्वसम्मति से हटा दिया गया. सूत्र कहते हैं कि पारस गुट अब तक पार्टी के प्रदेश अध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों के समर्थन जुटाने में असफल रही है. इधर राजनीतिक विष्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार संतोष कुमार सिंह भी कहते हैं, ‘पशुपति पारस के लिए चिराग को अध्यक्ष पद से हटाना आसान नहीं है.’ (एजेंसी इनपुट सहित)