सरकार की योजना है कि राज्य के सभी गांव और छोटे शहरों के छात्रों को भी बड़े शहरों जैसी तैयारी का माहौल मिलेगा. (Photo from Freepik)
इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए JEE और NEET जैसी कठिन परीक्षाएं देनी पड़ती हैं. इन एग्जाम्स में सफलता पाने के लिए ज्यादातर छात्र महंगी कोचिंग का सहारा लेते हैं, जो हर परिवार के लिए संभव नहीं होता. इसी अंतर को खत्म करने के लिए बिहार सरकारने अहम फैसला लिया है. अब सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को भी JEE, NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए खास सुविधा दी जाएगी. इसके तहत हर ब्लॉक में एक मॉडल स्कूल शुरू किया जाएगा, जहां पढ़ाई का स्तर प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप रखा जाएगा. सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों को बराबरी का अवसर मिल सके.
9वीं कक्षा से ही शुरू हो जाएंगी क्लास
इस योजना की खास बात यह है कि छात्रों को 9वीं कक्षा से ही प्रतियोगी परीक्षाओं की दिशा में तैयार किया जाएगा. अक्सर देखा जाता है कि छात्र 11वीं या 12वीं में जाकर तैयारी शुरू करते हैं, जिससे समय कम पड़ जाता है. मॉडल स्कूलों में छात्रों को शुरुआती स्तर से ही मजबूत नींव दी जाएगी. यहां अनुभवी शिक्षक और विषय विशेषज्ञ पढ़ाएंगे नियमित टेस्ट सीरीज, डाउट क्लियरिंग सेशन और करियर काउंसलिंग की सुविधा भी दी जाएगी. साथ ही आधुनिक लाइब्रेरी और बेहतर स्टडी मैटेरियल उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि छात्र बिना बाहरी कोचिंग के भी मजबूत तैयारी कर सकें.
हर ब्लॉक में खुलेगा मॉडल स्कूल
बिहार सरकार की योजना है कि राज्य के सभी 543 ब्लॉक में ये मॉडल स्कूल शुरू किए जाएं – यानी गांव और छोटे शहरों के छात्रों को भी बड़े शहरों जैसी तैयारी का माहौल मिलेगा. इससे शिक्षा का स्तर एक समान करने में मदद मिलेगी. सरकार चाहती है कि प्रतिभा सिर्फ संसाधनों की कमी की वजह से पीछे न रह जाए. इस नए सेशन से ही इन स्कूलों को शुरू करने की तैयारी की जा रही है. इससे हजारों छात्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है.
जानें कैसे ले सकेंगे एडमिशन
इन मॉडल स्कूलों में दाखिला सीधे नहीं मिलेगा, बल्कि इसके लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी. यह परीक्षा राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा कराई जाएगी. परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों को मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा. इससे यह सुनिश्चित होगा कि पढ़ाई का माहौल प्रतिस्पर्धी और गुणवत्तापूर्ण रहे. जिन छात्रों का चयन होगा, उन्हें नियमित रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं के पैटर्न पर पढ़ाया जाएगा और उनकी प्रगति की निगरानी भी की जाएगी.
गरीब छात्रों के लिए उम्मीद
यह पहल उन छात्रों के लिए खास है जो प्रतिभाशाली तो हैं, लेकिन आर्थिक कारणों से महंगी कोचिंग नहीं ले पाते. मॉडल स्कूलों के जरिए उन्हें सही मार्गदर्शन, संसाधन और माहौल मिलेगा. अगर योजना सही तरीके से लागू होती है, तो आने वाले सालों में बिहार से जेईई और नीट में चयनित छात्रों की संख्या बढ़ सकती है. यह कदम न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाएगा, बल्कि राज्य के युवाओं को नए सपने देखने और उन्हें पूरा करने का मौका भी देगा.
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