नई दिल्लीः पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Valley) में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद उठी आग अब भी शांत होने का नाम नहीं ले रही है. इस हिंसक झड़प में भारतीय सेना ने अपने 20 जवान खो दिए. जिसके बाद पूरे देश में आक्रोश का माहौल है. पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने सभी सैनिकों की शहादत को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनकी शहादत को सलाम किया. भारत-चीन के बीच हुई इस हिंसक झड़प (India-China Conflict) में सबसे अधिक सैनिक बिहार रेजिमेंट के शहीद हुए हैं. इस बीच सेना की उत्तरी कमान ने एक वीडियो जारी किया है, जिसके जरिए सेना ने यूनिट की लड़ाई के इतिहास का जश्न मनाया है. इसके जरिए सेना की उत्तरी कमान ने चीन पर चुटकी भी ली है. Also Read - कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किए 4 सवाल, कहा- क्या भारत के दावे को गलवान घाटी में कमजोर किया जा रहा है?

इस वीडियो के जरिए सेना की उत्तरी कमान ने बिहार रेजिमेंट के जवानों को ‘बैटमैन’ बतया है. वीडियो के कैप्शन में लिखा है- ‘लड़ाई के लिए जन्मे, ये वही करते हैं जो इन्हें करना चाहिए. वे बैट नहीं, बैटमैन हैं.’ इस वीडियो में बिहार रेजिमेंट के जवानों की शौर्यगाथा का इतिहास बताया गया है. 57 सेकेंड के इस वीडियो में कहा गया है – ‘दोस्तों, भारतवासियों और भारतीयों, मुझे अपने कुछ साल उधार दे दें, 21 साल पहले कारगिल के युद्ध और हर बड़े युद्ध में बिहार रेजिमेंट के जवानों ने अपनी छाप छोड़ी है.’ वीडियो में कारगिल युद्ध से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक के साथ ही बिहार के उन वीर सैनानियों का जिक्र है, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी. Also Read - हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा में भारत-चीन की सेनाओं ने पीछे हटना शुरू किया: रिपोर्ट

बता दें बिहार रेजिमेंट को भारतीय सेना का एक मजबूत अंग माना जाता है. कहा जाता है, बिहार रेजिमेंट के जवान इतने बहादुर होते हैं कि, वह किसी भी दुर्गम और जटिल परिस्थिती में आसानी से रह लेते हैं. जय बजरंगबली और बिरसा मुंडा की जय इस रेजीमेंट का वाक्य है. इस रेजिमेंट को बहादुरी के लिए अभी तक सैकड़ों मेडल मिल चुके हैं. हालांकि, इस वीडियो में कहीं भी गलवान घाटी का जिक्र नहीं है, लेकिन 15 जून को हुई इस झड़प में सबसे अधिक जवान बिहार के ही हैं. वीडियो में शहीदों की कहानी को तस्वीरों के जरिए बताया गया है. Also Read - India-China Border Issue: NSA अजित डोभाल ने संभाला मोर्चा तो पीछे हटी चीनी सेना! कल चीन के विदेश मंत्री से की थी बात

बिहार रेजिमेंट से जुड़ी खास बातें-
– बिहार रेजिमेंट का गठन आजादू के पूर्व 1941 में अंग्रेजों द्वारा किया गया था. यह भारतीय सेना की सबसे पुरानी पैदल सेना रेजिमेंट में से एक है.
– कारगिल युद्ध में करीब 10 हजार सैनिक बिहार रेजिमेंट के थे. घाटी के उरी सेक्टर में पाकिस्तान से आए आतंकियों का सफाया करते हुए इस रेजिमेंट के 15 जांबाज जवान शहीद हो गए. 2008 में भी मुंबई हमले में बिहार रेजिमेंट के एनएसजी के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन टोरनांडो में शहीद हो गए थे.
– बिहार रेजिमेंट की खासियत है कि इसके जवान बहादुर होने के साथ ही अत्यंत सहनशील भी होते हैं. यही वजह है कि दुर्गम और जटिल परिस्थितियों में अक्सर इनकी तैनाती की जाती है. क्योंकि ये हर परिस्थिति में आसानी से रह लेते हैं.
– बिहार रेजिमेंट वर्तमान में अपनी 23 बटालियन के साथ देश की सेवा कर रही है.

बैटल ऑनर्स
बटालियन को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ‘हका’ और ‘गंगाव’ के दौरान दो ‘बैटल ऑनर्स’ से सम्मानित किया गया था और बर्मा के ‘थिएटर ऑनर’ से भी सम्मानित किया गया था. बिहार रेजिमेंट को बहादुरी के लिए अभी तक 3 अशोक चक्र, 7 परम विशिष्ट सेवा मेडल, 2 महावीर चक्र. 41 शौर्य चक्र, पांच युद्ध सेवा मेडल, 14 कीर्ति चक्र, 8 अति विशिष्ट सेवा मेडल, 15 वीर चक्र, 3 जीवन रक्षा पदक, 31 विशिष्ट सेवा मेडल, 153 सेना मेडल, 5 युद्ध सेवा मेडल और 68 मेंशन इन डिसपैच मैडल मिल चुके हैं.