नई दिल्‍ली: बिहार के बालिका गृह कांड मामले में 29 लड़कियों के साथ बलात्कार और यातना देने की बात सामने आई है. मेडिकल रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कैसे बालिका गृह में छोटी-छोटी बच्चियों का शोषण किया गया. रिपोर्ट में बच्चियों के शरीर के कई हिस्‍सों पर जलने और कटने के निशान मिले हैं. रिपोर्ट में अनुसार बच्चियों का रोज यौन शोषण होता था और उन्‍हें नशीली दवाएं दी जाती थी या इंजेक्‍शन लगाया जाता था.

हमारे सहयोगी अखबार डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक, मुजफ्फरपुर जिले के बालिका गृह में सात और 17 साल की लड़कियों में से कुछ को यौन शोषण के चलते गर्भपात तक कराने को मजबूर होना पड़ा था. एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति की ओर से संचालित बालिका गृह में लड़कियों के साथ यौन शोषण की पुष्टि जांच रिपोर्ट में हुई है. जबकि कई जांच रिपोर्ट अभी आनी बाकी हैं. पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के सूत्र ने कहा कि कम से कम तीन या चार लड़कियों ने बताया कि वे अपने प्रवास (बालिका गृह में रहना) के दौरान गर्भवती हुईं और उन्हें गर्भपात करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

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बच्चियों के प्राइवेट पार्ट पर गहरी चोट के निशान
सूत्र ने बताया कि बच्चियों के प्राइवेट पार्ट पर जो निशान मिले हैं वो किसी तेज वस्तुओं द्वारा चोट पहुंचाई गई हो. मजिस्ट्रेट के सामने बयान में लड़कियों ने बताया कि उनके साथ एनजीओ मालिक ब्रजेश ठाकुर ने बार-बार बलात्कार किया. कुछ लड़कियों ने कहा कि उनके साथ लगभग हर दिन यातना, ड्रग और बलात्कार किया गया था. एक सात साल की बच्‍ची ने बताया कि ब्रजेश सर, नेहा मैम और किरण मैम ने उनके साथ शोषण किया था. सूत्रों ने बताया कि एक और सात वर्षीय बच्‍ची जो कि विकलांग है उसके हाथों पर कई चोटों के निशान मिले हैं. बताया गया है कि उसके साथ भी बार-बार बलात्कार और इनकार करने पर यातना दी गई थी.

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रेप से पहले बच्चियों को दिया जाता था इंजेक्‍शन और ड्रग
एक 10 वर्षीय बच्ची ने आरोप लगाया है कि बलात्कार से पहले उन्‍हें अक्सर ड्रग किया जाता था. अपने बयान में, उसने कहा है कि जब वह वापस होश में आती थी तो उसके प्राइवेट पार्ट वाले हिस्‍से में तेज दर्द होता था. सूत्रों ने कहा कि उन्होंने (बच्चियों ने) यह भी आरोप लगाया है कि आश्रय घर के पूरे कर्मचारी मालिक के साथ मिले हुए थे और वहां पर चल रहे सभी गलत कामों के बारे में जानते थे.

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