नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देश में रेप की बढ़ती घटनाओं पर आज गंभीर चिंता जताई. खासतौर पर बिहार के मुजफ्फरपुर में शेल्टर होम में लड़कियों के साथ रेप की वारदात को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार की खिंचाई करते हुए तल्ख टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि इस तरह की गतिविधियां सरकार प्रायोजित है. सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख अंदाज में कहा कि देश में लेफ्ट, राइट और सेंटर हर कहीं महिलाओं से रेप हो रहे हैं. ये क्या हो रहा है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिधर देखो, उधर ही, महिलाओं का बलात्कार हो रहा है. न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने मुजफ्फरपुर के बालिका आश्रय गृह का संचालन करने वाले गैर सरकारी संगठन को वित्तीय सहायता देने पर बिहार सरकार को आड़े हाथ लिया.Also Read - BJP के यूपी चीफ ने अखिलेश यादव की तुलना मुगल शासकों से की, बोले- इन सबने देश लूटा

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मुजफ्फरपुर के इस आश्रय गृह की लड़कियों से कथित रूप से बलात्कार और उनके यौन शोषण की घटनाएं हुई हैं. पीठ ने राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में हर छह घंटे में एक महिला बलात्कार की शिकार हो रही है. ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार 2016 में भारत में 38,947 महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ. इस स्थिति पर नाराजगी और चिंता जताते हुए पीठ ने कहा कि इसमें क्या करना होगा? लड़कियां और महिलायें हर तरफ बलात्कार की शिकार हो रही हैं. Also Read - Outreach Programme: नीरज चोपड़ा ने ‘आउटरीच कार्यक्रम’ लॉन्च किया, 75 स्कूलों के बच्चों से बातचीत की

पीड़ितों को अभी तक नहीं मिला मुआवजा
इस मामले में न्याय मित्र नियुक्त वकील अपर्णा भट ने पीठ को सूचित किया कि मुजफ्फरपुर आश्रय गृह में यौन उत्पीड़न की कथित पीड़ितों को अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि इस आश्रय गृह में बलात्कार का शिकार हुयी लड़कियों में से एक अभी तक लापता है. इस आश्रय गृह का निरीक्षण करने वाले टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज ने न्यायालय को बताया कि बिहार में इस तरह की 110 संस्थाओं में से 15 संस्थाओं के प्रति गंभीर चिंता व्‍यक्त की गयी हैं.

यौन उत्पीड़न के नौ मामले दर्ज
इस पर बिहार सरकार ने न्यायालय से कहा कि विभिन्न गैर सरकारी संगठनों द्वारा संचालित इन 15 संस्थानों से संबंधित यौन उत्पीड़न के नौ मामले दर्ज किये गये हैं. इससे पहले, शीर्ष अदालत ने बलात्कार और यौन हिंसा की शिकार इन पीड़िताओं के चेहरे ढकने के बाद भी उन्हें दिखाने से इलेक्ट्रानिक मीडिया को रोक दिया था. पीठ ने साफ शब्दों में कहा था कि उसने पुलिस को जांच करने से नहीं रोका है और यदि वह कथित पीड़ितों से सवाल जवाब करना चाहें तो उन्हें इसके लिए बाल मनोविशेषज्ञों की सहायता से ऐसा करना होगा.

(एजेंसी इनपुट)