पटना: बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव का सरकारी बंगला खाली कराने पहुंची अधिकारियों और पुलिस की टीम को बुधवार को विरोध का सामना करना पड़ा. बाद में तेजस्वी के वकील ने अदालत के कागजात दिखाए और उसके बाद बिना बंगला खाली कराए अधिकारियों की टीम वापस लौट गई. इस बीच तेजस्वी ने इस मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पूछा कि कानून अपना काम करेगा, फिर आप इतने व्याकुल क्यों हैं?

दोपहर बाद दिल्ली से पटना लौटे तेजस्वी ने यहां मीडियाकर्मियों से कहा कि नीतीश कुमार कुछ भी कर सकते हैं. उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास खुद कई मकान हैं, पटना से लेकर दिल्ली तक मकान हैं, पहले नीतीश कुमार मकान खाली करें.”

तेजस्वी ने कहा कि यह मामला अभी न्यायालय में है, और मुख्यमंत्री नकारात्मक राजनीति कर रहे हैं. तेजस्वी ने कहा, “यह बंगला उस समय भी सुशील कुमार के नाम पर आवंटित नहीं था, जब वह इससे पहले उपमुख्यमंत्री थे. हमने तो यह बंगला सुशील मोदी से लिया ही नहीं.”

इससे पहले, जिलाधिकारी से आदेश मिलने के बाद अधिकरियों की एक टीम पुलिस बल के साथ तेजस्वी के पटना में पांच देशरत्न मार्ग स्थित सरकारी आवास खाली कराने बुधवार सुबह पहुंची थी. इस दौरान आवास के बाहर एक पर्चा चिपकाया हुआ दिखा, जिस पर लिखा है कि बंगला खाली कराने का मामला अदालत में विचाराधीन है.

विपक्षी नेता के आप्त सचिव प्रीतम कुमार द्वारा जारी इस पर्चे में कहा गया है कि इस मामले की सुनवाई अदालत में सूचीबद्ध है. इसकी सूचना मिलते ही राजद विधायक और कार्यकर्ता भी यहां पहुंच गए और बंगला के सामने धरने पर बैठ गए. इधर, बंगला खाली कराने पहुंचे अधिकरियों को जब अदालत के कागजात दिखाए गए, तब वे वापस लौट गए.

इधर, पूर्व मंत्री तेजप्रताप का भी तेजस्वी को साथ मिला है. तेजप्रताप ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार बंगला बंगला नहीं खेले. उन्होंने कहा कि सरकार की नजर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर नहीं जाती है, लेकिन लालू परिवार को कैसे परेशान किया जाए, इसी पर ध्यान केंद्रित है.

भवन निर्माण मंत्री महेश्वर हजारी ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि तेजस्वी यादव जल्द ही बंगला खाली कर देंगे. सरकारी चीजें सिर्फ सरकारी ही होती हैं.”

बता दें कि आरजेडी जब सरकार में थी, तब यह बंगला तेजस्वी को आवंटित किया गया था. राजद के सरकार से अलग होने के बाद भवन निर्माण विभाग ने यह बंगला सुशील कुमार मोदी को आवंटित करते हुए तेजस्वी से बंगला खाली करने को कहा था. तेजस्वी ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी.

याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पिछले माह बंगला खाली करने का आदेश दिया था. तेजस्वी ने इसके बाद पटना हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ में अर्जी लगा दी.