
Rishabh Kumar
ऋषभ कुमार पाण्डेय डिजिटल मीडिया और खबरों की दुनिया में एक साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं. ऋषभ टेक और Off-Beat से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी रखते ... और पढ़ें
Bihar VIP Security: बिहार में नेताओं की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा को कम कर दिया गया है. पहले उन्हें Z श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी, लेकिन अब उनकी सुरक्षा को घटाकर Y+ श्रेणी कर दिया गया है.
गृह विभाग की ओर से जारी नए आदेश के बाद यह बदलाव किया गया है. इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. कुछ नेताओं की सुरक्षा बढ़ाई गई है, कुछ की घटाई गई है और कुछ नेताओं की सुरक्षा पूरी तरह हटा ली गई है. सरकार का कहना है कि यह फैसला सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और खुफिया जानकारी के आधार पर लिया गया है. इसमें किसी तरह का राजनीतिक भेदभाव नहीं किया गया है.
नए आदेश के अनुसार कुछ बड़े नेताओं की सुरक्षा को बढ़ाकर Z श्रेणी में कर दिया गया है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, बीजेपी बिहार अध्यक्ष संजय सरावगी और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे को अब Z श्रेणी की सुरक्षा दी गई है. Z श्रेणी की सुरक्षा सबसे ऊंचे स्तर की सुरक्षा मानी जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं. इसमें विशेष कमांडो, बुलेटप्रूफ वाहन और चौबीसों घंटे सुरक्षा व्यवस्था शामिल होती है. सरकार का कहना है कि इन नेताओं को ज्यादा खतरे की आशंका को देखते हुए यह सुरक्षा दी गई है, ताकि उनकी जान-माल की पूरी तरह से रक्षा की जा सके.
इस फैसले में एक और अहम बात यह है कि तीन वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा पूरी तरह से हटा ली गई है. इनमें मदन मोहन झा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी और राजेश राम का नाम शामिल है. बताया जा रहा है कि इन नेताओं को अब किसी तरह के बड़े खतरे की आशंका नहीं है, इसलिए उनकी सुरक्षा हटाई गई है. राज्य स्तरीय सुरक्षा समीक्षा समिति और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया गया है. सरकार का कहना है कि सुरक्षा केवल जरूरत के अनुसार दी जाती है. अगर खतरा कम हो जाता है, तो सुरक्षा हटाना भी जरूरी होता है ताकि संसाधनों का सही इस्तेमाल किया जा सके.
तेजस्वी यादव की सुरक्षा घटाए जाने के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए हैं. आरजेडी का कहना है कि यह फैसला राजनीति से प्रेरित है और जानबूझकर तेजस्वी यादव की सुरक्षा कम की गई है. पार्टी का आरोप है कि सरकार विपक्ष के नेताओं को कमजोर करने की कोशिश कर रही है. वहीं सरकार ने इन आरोपों को गलत बताया है. सरकार का कहना है कि सुरक्षा में बदलाव पूरी तरह से तकनीकी और सुरक्षा एजेंसियों के आकलन पर आधारित है. इसमें किसी नेता के पद या पार्टी को नहीं देखा जाता. सरकार ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर सुरक्षा दोबारा बढ़ाई भी जा सकती है.
Z श्रेणी की सुरक्षा में खतरे का स्तर बहुत अधिक माना जाता है. इसमें लगभग 22 सुरक्षाकर्मी होते हैं, जिनमें 4 से 6 NSG या CRPF के कमांडो शामिल रहते हैं. इसके साथ ही 3 से 5 या उससे ज्यादा पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं. बुलेटप्रूफ गाड़ी, एस्कॉर्ट वाहन और घर पर कई सशस्त्र गार्ड होते हैं. इसकी लागत भी काफी ज्यादा होती है.
वहीं Y+ श्रेणी की सुरक्षा मध्यम से उच्च खतरे वाले लोगों को दी जाती है. इसमें करीब 10 से 11 सुरक्षाकर्मी होते हैं. आमतौर पर CRPF या राज्य पुलिस के सशस्त्र गार्ड तैनात रहते हैं. इसमें 2 से 3 PSO होते हैं और घर पर 1 से 2 गार्ड रहते हैं. सुविधाएं Z श्रेणी से कम होती हैं, लेकिन फिर भी व्यक्ति की सुरक्षा के लिए यह पर्याप्त मानी जाती है.
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