नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा के उपचुनावों में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठजोड़ की जीत को देखते हुए भाजपा अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती है. यही वजह है कि बिहार में सीट बंटवारे पर राजग के सहयोगी दलों के बीच चल रही रस्साकशी थमी नहीं है. भाजपा नहीं चाहती कि यूपी की तरह ही क्षेत्रीय दलों का कोई गठबंधन उसे कमतर साबित करे. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और बिहार के सीएम नीतीश कुमार की मुलाकात के बाद भी राजग के सीट बंटवारे का मुद्दा सुलझा नहीं है. एक तरफ जहां जदयू, राज्य में अपने को ‘बड़ा’ मानते हुए मनमाफिक सीट की बात कर रहा है, वहीं लोजपा 2014 के चुनाव में मिली सीटों पर अड़ी है. दूसरी ओर, राजग की एक अन्य सहयोगी केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा भी पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा सीटें लेने की बात कर रही है. ऐसे में भाजपा फूंक-फूंककर कदम रख रही है.

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40 लोकसभा सीट, 4 पार्टियों के अपने-अपने मंसूबे
बिहार में 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) ने 3 सीटें जीती थीं. इस बार पार्टी प्रमुख और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा इससे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं. दूसरी ओर, राजग की बिहार में एक अन्य महत्वपूर्ण सहयोगी, लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के नेता और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पार्टी ने पिछले चुनाव में 6 सीटों पर जीत हासिल की थी. लोजपा प्रमुख भी इससे कम सीटों पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं हैं. वहीं, जदयू पहले से कह रहा है कि 2015 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के आधार पर मिली सीटों के मुताबिक, लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे में उसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए. ऐसे में पिछले लोकसभा चुनाव में 22 सीटें जीतने वाली भाजपा के लिए बिहार की 40 लोकसभा सीटों का राजग के दलों में बंटवारा करना कठिन हो गया है.

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बिहार भाजपा की नीति- ‘हैंडल विथ केयर’
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक खबर के अनुसार, बिहार में लोकसभा सीटों के बंटवारे पर बनी ताजा स्थिति को देखते हुए भाजपा कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती, जिससे कि विपक्षी दलों को फायदा हो. साथ ही वह यूपी में हुए उपचुनावों में विपक्षी पार्टियों का ‘दम‘ देखते हुए कोई जोखिम भी नहीं लेना चाहती है. बिहार भाजपा से जुड़े महत्वपूर्ण सूत्र ने अखबार को बताया, ‘जिस तरह यूपी में सपा-बसपा के गठजोड़ का नतीजा दिखा है, भाजपा बिहार में अपने सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे को लेकर किसी तरह का जोखिम नहीं उठाएगी. हम सभी सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे. हमारा उद्देश्य स्पष्ट है- हैंडल विथ केयर.’ बिहार भाजपा का यह रुख दिखाता है कि विपक्षी दलों के संभावित महागठबंधन और राजग में अपने सहयोगियों की खींचातानी को देखते हुए पार्टी ‘डिफेंसिव मूड’ में है.