नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के लिए बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पटना साहिब सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार होंगे. इस समय पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा लोकसभा सांसद हैं. लेकिन यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि इस बार बीजेपी की ओर से पटना साहिब सीट पर शत्रुघ्न सिन्हा नहीं लड़ेंगे. हमारे सहयोगी न्यूज को बीजेपी के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पटना साहिब लोकसभा सीट पर सुशील कुमार मोदी को टिकट दिया जा सकता है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद शत्रुघ्न सिन्हा को कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया था, जिसके बाद शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी हल्की नाराजगी जाहिर की थी. वहीं, कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी उनका नाम स्टार प्रचारक के रूप में शामिल नहीं किया गया, जिसके बाद से सिन्हा ने अपनी नाराजगी खुले रूप से दिखाने लगे हैं.

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पिछले एक साल से वह बीजेपी सरकार के खिलाफ कई मौकों पर बयान दे चुकें है. हालांकि लोकसभा चुनाव नजदीक होने के बावजूद शत्रुघ्न सिन्हा ने आधिकारिक ऐलान नहीं किया है कि वह बीजेपी से चुनाव लड़ेंगे या फिर किसी और पार्टी से. शत्रुघ्न सिन्हा ने कई मौकों पर संकेत दिया है कि वह बीजेपी के अलावा किसी और पार्टी में शामिल हो सकते हैं. उन्होंने आरजेडी से अपनी नजदीकियां खुले तौर पर दिखाई थी और तेजस्वी यादव की खुलकर तारीफ की थी.पटना साहिब सीट से बीजेपी के कई नेताओं के नाम सामने आए हैं. लेकिन बीजेपी के सूत्रों से कहा गया है कि इस सीट पर बीजेपी के वरीष्ठ नेता सुशील मोदी को टिकट दिया जा सकता है.

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गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने बुधवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की. समझा जाता है कि दोनों नेताओं ने लोकसभा चुनाव के लिए बिहार में गठबंधन सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे के समझौते पर चर्चा की.कुमार ने हाल ही में कहा था कि उनकी पार्टी भाजपा के साथ सम्मानजनक समझौते पर पहुंच गयी है लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया था कि राज्य की कुल 40 सीटों में से उनकी पार्टी कितनी सीटों पर किस्मत आजमाएगी.

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राजनीतिक सूत्रों ने कहा कि यह भी फैसला होना है कि जदयू कौन सी सीटों पर चुनाव लड़ेगी क्योंकि 2014 में नीतीश कुमार की पार्टी भाजपा नीत राजग का हिस्सा नहीं थी. भाजपा ने तब 30 सीटों पर चुनाव लड़ा था. राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी को सात सीटें लड़ने के लिए मिली थीं और उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा तीन सीटों पर चुनाव लड़ी थी. 2013 में राजग का साथ छोड़ने से पहले जदयू ने गठबंधन में रहते हुए भाजपा से अधिक सीटों पर किस्मत आजमाई थी.