Black Fungus के बाद अब White Fungus मिलने से मचा हड़कंप, ज्यादा है खतरनाक, ऐसे करता है अटैक

Black Fungus के बाद अब बिहार की राजधानी पटना में White Fungus के चार मरीज मिलने से मचा है हड़कंप, यह फंगस ज्यादा खतरनाक है, जानिए कैसे करता है अटैक...

Published date india.com Published: May 20, 2021 1:16 PM IST
white fungus
white fungus (Picture for representation)

White Fungus: अब तक कोरोना वायरस की वजह से ब्लैक फंगस (mucormycosis) से जूझ रहे लोगों के लिए एक नई मुसीबत सामने आई है, जिसका नाम है- व्हाइट फंगस. बिहार के पटना के अस्पताल में इसके चार मरीज मिलने से अफरातफरी मच गई है. ब्लैक फंगस से ये बीमारी ज्यादा घातक मानी जा रही है. पटना में व्हाइट फंगस से मिले संक्रमित मरीजों में पटना के एक फेमस स्पेशलिस्ट भी शामिल हैं. व्हाइट फंगस (Candidiasis) फेफड़ों के संक्रमण का मुख्य कारण है और फेफड़ों के अलावा, स्किन, नाखून, मुंह के अंदरूनी भाग, आमाशय और आंत, किडनी, गुप्तांग और ब्रेन आदि को भी संक्रमित करता है.

जांच से पता चला

पटना मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल (PMCH) में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के हेड डॉ. एसएन सिंह के मुताबिक, अब तक ऐसे चार मरीज मिले जिनमें कोविड-19 जैसे लक्षण थे. पर वे कोरोना नहीं बल्कि व्हाइट फंगस से संक्रमित थे. मरीजों में कोरोना के तीनों टेस्ट रैपिड एंटीजन, रैपिड एंटीबॉडी और RT-PCR टेस्ट निगेटिव थे, जो जांच होने पर सिर्फ एंटी फंगल दवाओं से ठीक हो गए. इसमें पटना के चर्चित सर्जन भी हैं जिन्हें एक बड़े प्राइवेट अस्पताल में कोरोना वार्ड में भर्ती कराया गया था. जांच से पता चला कि वे व्हाइट फंगस से पीड़ित हैं.

कोरोना जैसे ही लक्षण होते हैं
व्हाइट फंगस से फेफड़ों के संक्रमण के लक्षण HRCT में कोरोना जैसे ही दिखते हैं, इसकी वजह से  इसमें अंतर करना मुश्किल हो जाता है कि कोरोना है या व्हाइट फंगस. क्योंकि ऐसे मरीजों में रैपिड एंटीजन और RT-PCR टेस्ट निगेटिव होता है. ऐसे मरीजों का रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट और फंगस के लिए बलगम का कल्चर कराना चाहिए. कोरोना मरीज जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं उनके फेफड़ों को यह संक्रमित कर सकता है.

किन्हें है ज्यादा खतरा

डायबिटीज, एंटीबायोटिक का सेवन या फिर स्टेरॉयड का लंबा सेवन करने वाले लोगों, कैंसर के मरीज जो दवा पर हैं, उन्हें यह जल्दी अपनी गिरफ्त में लेता है.

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नवजात में यह डायपर कैंडिडोसिस के रूप में होता है. जिसमें क्रीम कलर के सफेद धब्बे दिखते हैं. छोटे बच्चों में यह ओरल थ्रस्ट करता है तो वहीं महिलाओं में यह ल्यूकोरिया का मुख्य कारण है.

इससे बचने के लिए ये करें
जो मरीज ऑक्सीजन या वेंटिलेटर पर हैं उनके ऑक्सीजन या वेंटिलेटर उपकरण विशेषकर ट्यूब आदि जीवाणु मुक्त होने चाहिए.

ऑक्सीजन सिलेंडर ह्यूमिडिफायर में स्ट्रेलाइज वाटर का प्रयोग करना चाहिए, जो ऑक्सीजन मरीज के फेफड़े में जाए वह फंगस से मुक्त हो.

जिन मरीजों का रैपिड एंटीजन और RT-PCR टेस्ट निगेटिव हो और जिनके HRCT में कोरोना जैसे लक्षण हों, उनका रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट कराना चाहिए,

बलगम के फंगस कल्चर की जांच भी कराना चाहिए.

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