पटना : बिहार की राजधानी के बाहरी हिस्से में एक छोटे से गांव में दलित महिलाओं के एक समूह ने एक संगीत बैंड बनाया है जो सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ रहा है. नारी गूंज नामक गैर सरकारी संगठन की संचालक सुधा वर्गीस ने इस बैंड की नींव रखी है और वही इसकी अगुवाई भी कर रही हैं. पटना के दानापुर इलाके के धिबरा गांव की 10 महिलाएं इस सरगम बैंड की सदस्य हैं. ये बैंड शादी-विवाह, मांगलिक एवं अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुतियां देता है.

इस बैंड के बारे में बात करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सुधा वर्गीस की आंखों में चमक आ जाती है वो कहती हैं कि रविदास समुदाय की ये महिलाएं खुद के लिए विशिष्ट पहचान बनाने में लगी हैं. उनका कहना है कि हुनरमंद तो ये खुद ही हैं इन्हें समाज में खुद की पहचान की दरकार है. इस छोटे से बैंड के जरिए उसकी शुरुआत हो गई है. मीडिया से बातचीत में सुधा कहती हैं कि 2016 में मुझे ये बैंड बनाने का विचार सूझा.

उन्होंने कहा जब वो रविदास समुदाय की महिलाओं के लिए काम कर रही थी तो वहां अधिकतर महिलाएं कृषक श्रमिक थीं. वो उनके सामाजिक और आर्थिक उत्थान के तरीकों के बारे में सोचना चाहती थी. सुधा वर्गीज बताती हैं कि जब उन्होंने धिबरी गांव की महिलाओं के साथ अपने विचार साझा किए तब शुरूआत में उनकी प्रतिक्रिया अविश्वास के रूप में सामने आई. हालांकि यह अस्वाभाविक प्रतिक्रिया नहीं थी. उनका कहना है कि इस पिछड़े इलाके में किसी ने भी महिलाओं के संगीत बैंड के बारे में नहीं सुना था. इस समाज में ये काम पुरूषों का काम माना जाता है.

सुधा के अनुसार शुरूआती हिचकिचाहट के बाद इन महिलाओं ने साहस से काम लिया. शुरुआत में थोड़ी सी दिक्कतें जरूर आईं क्योंकि ये पुरुषों के काम में दखलंदाजी माना जा रहा था. लेकिन स्वीकार्यता बढ़ने के साथ अब उनका उत्साह बेहद बढ़ चुका है और वो दूसरे प्रयोग करने के लिए भी तैयार हैं. बैंड की महिलाएं सामाजिक कार्यकर्ता सुधा वर्गीज को ‘सुधा दीदी’ कह कर पुकारती हैं. आस पास के इलाकों में अब ये बैंड काफी लोकप्रिय हो चुका है. राज्य की सीमा से निकल कर ये बैंड अब हर स्तर पर अपनी पहचान बनाने को आतुर है. (इनपुट एजेंसी)