नई दिल्‍ली: सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बुधवार मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन उत्पीड़न समेत अन्‍य 17 मामलों में स्‍टेट्स रिपोर्ट पेश कर दी है. इसमें सीबीआई सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि मुजफ्फरपुर आश्रय गृह मामले समेत बिहार के सभी 17 आश्रय घरों के मामलों की जांच पूरी हो गई है. अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा है कि मुजफ्फरपुर के आश्रय गृह में मिले कंकालों में कोई भी लड़की का नहीं था.

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मुजफ्फरपुर आश्रय गृह में जिन बच्चों की हत्या किए जाने का आरोप लगाया गया था, वे बाद में जिंदा मिले. सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर आश्रय गृह मामले पर सीबीआई की स्‍टेट्स रिपोर्ट स्वीकार कर ली है.

चीफ जस्टिस एस.ए. बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने इस मामले की जांच के बारे में सीबीआई की प्रगति रिपोर्ट स्वीकार कर ली और साथ ही जांच दल के दो अधिकारियों को इससे मुक्त करने की भी अनुमति प्रदान कर दी.

 जिन बच्चों की हत्या बताई, वे जिंदा मिले
जांच एजेंसी ने शीर्ष अदालत को बताया कि आश्रय गृह परिसर से दो कंकाल बरामद हुए थे, लेकिन फारेंसिक जांच में पता चला कि वे एक महिला और एक पुरुष के थे. सीबीआई की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि बच्चों से बलात्कार और यौन हिंसा के आरोपों की जांच का काम पूरा हो गया है ओर संबंधित अदालतों में आरोप पत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं. वेणुगोपाल ने कहा कि जिन बच्चों के बारे में बताया जा रहा था कि उनकी हत्या कर दी गई है, उन्हें खोज लिया गया है और वे जीवित हैं.

17 आश्रय गृहों के मामलों की जांच में से 13 में आरोप पत्र दाखिल
अटार्नी जनरल ने कहा कि सीबीआई ने बिहार में 17 आश्रय गृहों के मामलों की जांच की और इनमें से 13 मामलों में आरोप पत्र दाखिल कर दिए गए हैं, जबकि चार मामलों में प्रारंभिक जांच की गई और बाद में उन्हें बंद कर दिया गया, क्योंकि उनमें किसी प्रकार की गड़बड़ी के साक्ष्य नहीं मिले. सीबीआई ने इन मामलों की जांच की प्रगति रिपोर्ट सोमवार को न्यायालय में पेश की थी.

चार मामलों में किसी भी प्रकार का अपराध होने के साक्ष्य नहीं मिले
सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इन चार मामलों में किसी भी प्रकार का अपराध होने के साक्ष्य नहीं मिले और इसलिए इनमें कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई.

एनजीओ को काली सूची में डालने का अनुरोध
जांच ब्यूरो ने यह भी कहा था कि बिहार सरकार को जांच रिपोर्ट के नतीजे सौंपने के साथ ही उससे विभागीय कार्रवाई करने और संबंधित गैर सरकारी संगठनों का पंजीकरण रद्द करने तथा उन्हें कालीसूची में डालने की कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है.

मामले में एक नजर
– मुजफ्फरपुर में एक गैर सरकारी संगठन द्वारा संचालित आश्रय गृह में अनेक लड़कियों का कथित यौन शोषण करने और उनके साथ हिंसा का मामला टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की एक रिपोर्ट से उजागर हुआ था
– रिपोर्ट के बाद ही शीर्ष अदालत में एक जनहित याचिका दायर की गई
– याचिका में FIR दर्ज करने और कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने का अनुरोध किया गया था
– सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी
– पहले बिहार पुलिस इस मामले की जांच कर रही थी
– कोर्ट ने इस आश्रय गृह की लड़क‍ियों के साथ यौन हिंसा की घटनाओं में बाहरी व्यक्तियों की संलिप्तता की जांच का भी निर्देश दिया था
– कोर्ट ने बाद में इस मामले को बिहार से दिल्ली की साकेत पोक्सो अदालत में स्थानांतरित कर दिया था