Bihar Assembly Election 2020: दिल्‍ली में बीजेपी के शीर्ष नेताओं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अध्यक्ष जे पी नड्डा ने गुरुवार को लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष चिराग पासवान के साथ बैठक कर आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दलों के बीच सीटों के बंटवारे के मामले को सुलझाने का प्रयास किया. Also Read - शिवराज चौहान ने पूछा- क्या राहुल गांधी की कांग्रेस अलग है और कमलनाथ की कांग्रेस अलग?

लोजपा सूत्रों के मुताबिक, पासवान ने इस बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री और राजग के प्रमुख घटक दल जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष नीतीश को लेकर पार्टी की शिकायतों से अवगत कराया. इस दौरान उन्होंने 143 सीटों पर चुनाव लड़ने के पार्टी के अंदरूपी दबाव के बारे में भी भाजपा नेताओं को बताया. Also Read - MP उपचुनाव: 18 प्रतिशत प्रत्याशियों पर हैं अपराधिक मामले, दागियों को टिकट देने में सपा-बीजेपी आगे

लोजपा के एक नेता ने बताया, ‘‘बैठक में सीटों के बंटवारे को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है.” इस नेता ने बताया कि शाह ने बैठक में स्पष्ट किया कि लोजपा के साथ भाजपा का कोई मतभेद नहीं है. शाह पहले नड्डा के आवास पर पहुंचे थे. बाद में चिराग पासवान भी इसमें शामिल हुए. Also Read - Bihar Assembly Election 2020 : चिराग पासवान बोले- अगर लोजपा सत्ता में आती है तो नीतीश कुमार सलाखों के पीछे होंगे

इससे पहले बुधवार को भाजपा नेताओं की सीटों के बंटवारें को लेकर बैठक हुई थी. शाह उस बैठक में भी शामिल हुए थे. आज की बैठक में भी शाह की मौजूदगी से संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा ने सीटों के बंटवारे को लेकर सहयोगी दलों से अंतिम दौर की बातचीत से पहले अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है.

आधिकारिक सूत्रों की मानें तो जल्द ही सीटों के बंटवारे को लेकर घोषणा की जाएगी और चार या पांच अक्टूबर को पहले चरण के मतदान वाली सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जाएगी. पहले चरण के तहत राज्य की 243 में से 71 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है. इसके लिए नामांकन की प्रक्रिया गुरुवार को आरंभ हो जाएगी, जो 8 अक्टूबर तक चलेगी.

लोजपा ने संकेत दिए हैं कि यदि सीटों का ”सम्मानजनक” बंटवारा नहीं हुआ तो वह राज्य की 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है.

वर्ष 2015 के चुनाव में लोजपा 42 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसे महज दो ही सीटों पर जीत मिल सकी थी. उस चुनाव में जद(यू) महागठबंधन का हिस्सा था. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस के साथ मिलकर उसने राजग को पटखनी दी थी.