Bihar: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सह कांग्रेस के महासचिव हरीश रावत ने पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) की अध्यक्ष मायावती (Mayawati) को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ (Bharat Ratna) देने की मांग की, जिसपर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने तंज कसा और कहा है कि ‘उन लोगों के पास पहले ही सरकार थी. जो आज मांग कर रहे हैं पहले ही दिलवा देते.’Also Read - Rajasthan News: अशोक गहलोत ने दिये संकेत, राजस्थान में फिर होगा कैबिनेट में फेरबदल; जानें क्या बोले सीएम

पूर्व केंद्रीय मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए इस सुझाव के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने कहा, ‘देश में लोकतंत्र है और सबको अपनी मांग उठाने का अधिकार है.’ कांग्रेस विधायकों में टूट की चर्चा को लेकर पूछे गए एक प्रश्न पर नीतीश ने कहा, ‘हम तो अपने काम में लगे रहते हैं. इन सब चीजों पर ध्यान नहीं देते हैं.’ Also Read - कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी! NCP प्रमुख शरद पवार से मुलाकात के बाद बोलीं ममता बनर्जी, 'अब कोई UPA नहीं'

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हरीश रावत ने उठाई सोनिया गांधी और मायावती को भारत रत्न देने की मांग
बता दें कि कांग्रेस महासचिव हरीश रावत (Harish Rawat) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए लिखा था, ‘आदरणीय सोनिया गांधी जी व सम्मानित बहन मायावती जी, दोनों प्रखर राजनैतिक व्यक्तित्व हैं. आप उनकी राजनीति से सहमत और असहमत हो सकते हैं, मगर इस तथ्य से इनकार नहीं कर सकते हैं कि सोनिया जी ने भारतीय महिला की गरिमा और सामाजिक समर्पण व जनसेवा के मानदंडों को एक नई ऊंचाई व गरिमा प्रदान की है.

उन्होंने आगे लिखा कि दोनों महिलाओं को भारत की नारीत्व का गौरवशाली स्वरूप माना जाता है. सुश्री मायावती जी ने वर्षों से पीड़ित-शोषित लोगों के मन में एक अद्भुत विश्वास का संचार किया है. ऐसे में भारत सरकार को चाहिए कि इन दोनों व्यक्तित्वों को इस वर्ष का भारत रत्न देकर अलंकृत करें.’

रावत के बयान पर बसपा ने भी ली चुटकी

हरीश रावत के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए बसपा ने कहा था कि उनकी मांग केवल सार्वजनकि रूप से मूर्ख बनाने की रणनीति से ज्यादा कुछ भी नहीं है. पार्टी का कहना था कि कांग्रेस की सरकारें बाबा साहेब आम्बेडकर को सर्वोच्च सम्मान देने में विफल रहीं. बीएसपी संस्थापक कांशीराम और मायावती सहित अन्य बीएसपी नेताओं ने मांग भी उठाई थी.

बीएसपी ने कहा कि हम लोगों ने कांशीराम के लिए भी इसी सम्मान की मांग की थी. लेकिन जब कांग्रेस सत्ता में थी तो उसने इसके लिए कुछ नहीं किया और अब जब वे सत्ता में नहीं हैं तो ऐसी मांग कर रहे हैं.