नई दिल्ली. बिहार में शराबबंदी कानून को लागू हुए बीते 6 अप्रैल को 2 साल पूरे हुए. इस मौके पर एक तरफ जहां प्रदेश के सीएम नीतीश कुमार ने शराबबंदी कानून की तारीफ की थी, वहीं बिहार की जेलों की एक रिपोर्ट इस कानून को ‘चिकोटी’ काटती नजर आई थी. नीतीश कुमार ने इस कानून की तारीफ में कहा था कि इससे समाज में बड़ा बदलाव हुआ है. बिहार में लाखों लोगों को फायदा हुआ है, कई परिवार सुखी हुए हैं. वहीं, बिहार की जेलों की एक रिपोर्ट ने बताया था कि इस कानून की वजह से एससी/एसटी और ओबीसी वर्ग के लोगों पर सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई है. तभी से विपक्ष इस कानून को लेकर सीएम नीतीश कुमार पर हमलावर हो गया था. लिहाजा, कल अपनी पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में सीएम नीतीश कुमार ने इस कानून में बदलाव करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मी और शराब के धंधेबाज इस कानून की कमियों का फायदा उठाते हैं. इन पर नकेल कसने के लिए शराबबंदी कानून में जरूरी संशोधन किया जाएगा.

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बेवजह लोगों को तकलीफ न हो, ऐसा उपाय करेंगे
सीएम नीतीश कुमार ने मंगलवार को संपूर्ण क्रांति दिवस के अवसर पर युवा जदयू कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने शराबबंदी कानून में संशोधन के संकेत दिए. सीएम ने कहा कि इस कानून की तरह-तरह से व्याख्या हो रही है. कुछ लोगों को दिक्कतें हो रही हैं, वे ही सबसे ज्यादा बोल रहे हैं. लेकिन गरीबों को इस कानून से फायदा हुआ है. वहीं, कुछ लोग सरकारी तंत्र की कमियों का लाभ उठाकर ‘घच-पच’ कर रहे हैं. ऐसे लोगों पर मेरी नजर है. सीएम ने कहा कि अप्रैल 2016 में लागू करने के बाद 2 अक्टूबर 2016 को नया शराबबंदी कानून लागू किया गया. इस कानून की लगातार समीक्षा हो रही है. अब भी विचार-मंथन कर रहे हैं. कुछ चीजों में संशोधन करना है, वह भी करेंगे. बेवजह आम लोगों को तकलीफ न हो, इसके लिए सारे उपाय करेंगे.

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जेलों में कैदियों की रिपोर्ट को कहा दुष्प्रचार
बिहार की जेलों में शराबबंदी कानून के कारण एससी/एसटी और ओबीसी वर्ग के लोगों के सबसे ज्यादा प्रताड़ित होने को लेकर भी सीएम नीतीश कुमार ने अपनी बात रखी. उन्होंने इस कानून के कारण प्रताड़ना संबंधी बातों को विपक्ष का दुष्प्रचार बताया. उन्होंने कहा कि जो लोग कहते हैं शराबबंदी कारण एससी/एसटी और ओबीसी और ईबीसी वर्ग के लोगों जेलों में हैं, वे पहले यह बताएं कि दूसरे अपराधों में किस-किस जाति के लोग जेल में हैं. सीएम ने कहा कि दरअसल शराबबंदी का सबसे अधिक फायदा गरीब-गुरबों को हुआ है, यह बात विरोधियों को पसंद नहीं आ रही है. इसलिए वे इस कानून का विरोध कर रहे हैं और सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं. लेकिन समाज में बड़ा सुधार करने पर सब कुछ भुगतना पड़ता है और मैं इसके लिए तैयार हूं. बता दें कि कुछ दिन पहले बिहार की जेलों की एक रिपोर्ट आई थी कि राज्य में एससी जाति 16% है, लेकिन शराबबंदी के नियम को तोड़कर जेल में बंद कैदियों की संख्या 27.1 फीसदी है. वहीं एसटी की आबादी 1.3 फीसदी है, लेकिन जेल में 6.8% कैदी हैं. वहीं, राज्य में ओबीसी की संख्या 25 फीसदी है, लेकिन कैदियों का औसत देखें तो उनकी संख्या 34.4 फीसदी हैं.

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दो साल में शराबबंदी को लेकर 62 हजार केस
बिहार में अप्रैल 2016 से लागू शराबबंदी कानून को लेकर सरकारी सख्ती के आंकड़े, सीएम नीतीश कुमार के बयानों की पुष्टि करते हैं. दरअसल, शराबबंदी कानून के तहत पिछले 2 साल में 62 हजार केस दर्ज किए गए हैं. वहीं पुलिस ने लगभग 9 लाख लीटर शराब जब्त की और इस मामले में करीब 92 हजार लोग पकड़े गए. इसके अलावा इसी कानून के तहत की गई कार्रवाई में 654 वाहन पकड़े गए, 159 निजी मकान, 28 व्यावसायिक भवन और भूखंड जब्त किए गए. सबसे आश्चर्यजनक आंकड़ा यह है कि इस कानून के तहत पिछले 2 वर्षों में 32 पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई. शराबबंदी कानून के तहत बिहार में सख्त सजा का प्रावधान है. इसे गैरजमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है. कानून के उल्लंघन पर कम से कम 10 साल की कैद और उम्रकैद की सजा हो सकती है. वहीं शराब मिलने पर 1 लाख रुपए का जुर्माना, वाहन, घर या कैंपस जब्त किए जा सकते हैं.