पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को कोरोना संक्रमण रोकने तथा लॉकडाउन से उत्पन्न स्थिति पर एक उच्चस्तरीय बैठक हुई. बैठक में पटना तथा अन्य शहरों में रहने वाले दैनिक मजदूर और अन्य राज्यों के व्यक्ति जो लॉकडाउन के कारण फंसे हुए हैं, उनके रहने और भोजन की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया. बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्णय लिया कि तत्काल पटना तथा अन्य शहरों में रहने वाले रिक्शा चालक, दैनिक मजदूर और अन्य राज्यों के व्यक्ति जो लॉकडाउन के कारण फंसे हुए हैं, उनके रहने और भोजन की व्यवस्था की जाएगी. Also Read - Coronavirus Spreading Through Air? हवा के जरिए तेजी से फैल रहा है कोरोना वायरस, स्टडी में हुए चौंकाने वाले खुलासे

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, “बैठक में इसी तरह बिहार के लोग जो अन्य राज्यों में काम करते हैं और वे लॉकडाउन के कारण वहां फंसे हुए हैं, या रास्ते में हैं, उनके लिए भी सरकार स्थानिक आयुक्त, नई दिल्ली के माध्यम से संबंधित राज्य सरकारों या जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित कर भोजन तथा रहने की व्यवस्था करेगी.” मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस कार्य के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से आपदा प्रबंधन विभाग को 100 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी गई है. Also Read - Maharashtra और Delhi का COVID-19 से बुरा हाल, 20% के करीब पहुंची संक्रमण की दर, महाराष्ट्र में 400 की मौत

बिहार में पटना तथा अन्य शहरों में ऐसे लोगों के लिए वहीं पर आपदा राहत केंद्र स्थापित किया जाएगा तथा इन जगहों पर व्यवस्था करने में सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखा जाएगा. आपदा राहत केंद्रों पर कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए चिकित्सक उपलब्ध रहेंगे. मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद कहा, “सरकार कोरोना संक्रमण के कारण लोगों के फंसे होने की स्थिति को आपदा मान रही है और ऐसे लोगों की मदद उसी तरह की जाएगी जैसे अन्य आपदाओं में आपदा पीड़ितों की की जाती है.” उन्होंने कहा कि बिहार के निवासी बिहार के किसी शहर में या बिहार के बाहर जहां भी फंसे हों वहीं पर उनकी मदद की जाएगी तथा बिहार में जो अन्य राज्यों के लोग फंसे हैं, उनके लिए भी राज्य सरकार अपने स्तर से भोजन और रहने की व्यवस्था करेगी. Also Read - COVID-19: एक्शन में आया स्वास्थ्य मंत्रालय, कोरोना पर केंद्र के सभी मंत्रालयों को एडवाइजरी जारी