नई दिल्ली. पूर्व मध्य रेलवे ने देश के सबसे पावरफुल इलेक्ट्रिक रेल इंजन का ट्रायल शुरू कर दिया है. यह इंजन 12 हजार हॉर्स पावर का है जो वर्तमान में चल रही गुड्स ट्रेन के इंजनों के मुकाबले दोगुनी रफ्तार में माल ढो सकेगा. बिहार के मधेपुरा रेल इंजन कारखाने में बना यह इंजन देश में बने इंजनों में सबसे ज्यादा शक्तिशाली है. यह कारखाना रेल मंत्रालय और फ्रांस की कंपनी ऑल्सटम के ज्वाइंट वेंचर के तहत बनाया गया है. इसका नाम मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार रेलवे अभी गुड्स ट्रेनों में डब्ल्यूएजी-9 नामक इंजन का उपयोग करता है. नए इंजन के आ जाने के बाद देश में रेलवे द्वारा माल वाहन की गति बढ़ जाएगी. क्योंकि नया इंजन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ज्यादा की गति से दूरी तय कर सकेगा.

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर पर होगा इस्तेमाल
मधेपुरा कारखाने में बने इंजनों को ट्रायल के बाद नियमित इस्तेमाल में लाया जाएगा. रेलवे की योजना इन इंजनों से ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर पर माल ढुलवाने की है. यह फ्रेट कॉरीडोर देश में माल ढुलाई के लिए ही बन रहा है. इससे आने वाले समय में एक स्थान से दूसरे स्थान तक माल ले जाने या पहुंचाने में कम समय लगेगा. इससे जहां एक तरफ कारोबारियों का समय बचेगा, वहीं रेलवे की आमदनी भी बढ़ेगी. एएनआई के अनुसार नया इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम है. इसलिए यह कम समय में माल ढुलाई के लिए सबसे उपयुक्त होगा.

 

अभी रेलवे माल ढुलाई के लिए डब्ल्यूएजी-9 इंजन का करती है इस्तेमाल. (फोटो साभारः भारतीय रेल)

अभी रेलवे माल ढुलाई के लिए डब्ल्यूएजी-9 इंजन का करती है इस्तेमाल. (फोटो साभारः भारतीय रेल)

 

10 हजार हॉर्स पावर से ज्यादा का पहला इंजन
रेल मंत्रालय और फ्रांसीसी कंपनी के सहयोग से भारत में तैयार यह नया लोकोमोटिव देश में बने अब तक के सभी लोकोमोटिव से ज्यादा शक्तिशाली है. एएनआई के अनुसार यह पहला इंजन है जो 10 हजार से ज्यादा हॉर्स पावर की क्षमता का है. इससे पहले रेलवे चितरंजन रेल कारखाना द्वारा बनाए गए डब्ल्यूएजी-9 का इस्तेमाल गुड्स ट्रेनों में करती रही है. यह वर्तमान में माल ढुलाई के लिए सबसे पावरफुल इंजन माना जाता है. डब्ल्यूएजी-9 इंजन को नवंबर 2014 में पहली बार ट्रैक पर उतारा गया था.

ज्यादा पावर के 800 इंजनों को बनाने का करार
फ्रांसीसी कंपनी ऑल्सटन के साथ रेलवे ने जिस मधेपुरा रेल कारखाना में इंजन बनाने का करार किया है, उसके तहत देश में ऐसे 800 इंजन बनाए जाने हैं. मंत्रालय और कंपनी के बीच 2015 के बीच 3.3 बिलियन डॉलर का यह करार हुआ था. यह भारतीय रेल के लिए एक रिकॉर्ड डील थी. ऑल्सटन कंपनी दुनिया में रेल ट्रांसपोर्ट संबंधी निर्माण के लिए जानी जाती है.