Farmer Protest Bihar: बिहार में भी कृषि कानून के विरोध में विपक्षी राजनीतिक दल एक जुट होकर सत्ता पक्ष पर दबाव बनाने की जुगत में लगी हैं वैसे, बिहार में इसका विरोध किसानों के बीच वैसा देखने को नहीं मिल रहा है, लेकिन वामपंथी दल इसे लेकर अब गांवों में जाने की योजना बना रहे हैं. बिहार के किसान नेता भी मानते हैं कि यहां के किसानों को कृषि कानून से कोई मतलब नहीं. कृषि कानून किस चिड़िया का नाम है, उन्हें नहीं मालूम. Also Read - 100 Days Of Farmers Protest : किसान आंदोलन के 100 दिन हुए पूरे, जानिए क्या है आज किसानों का प्लान

बिहार में दाल उत्पादन के लिए चर्चित टाल क्षेत्र के किसान और टाल विकास समिति के संयोजक आंनद मुरारी कहते है, बिहार के किसान कानून का विरोध करें या अपने परिवार की पेट भरने के लिए काम करें. यहां के किसानों को नहीं पता है कि एमएसपी किस चिड़िया का नाम है, यहां के किसान भगवान भरोसे चल रहे हैं और सरकारें उनका शोषण कर रही हैं. Also Read - Tractor Parade Video: दिनभर उत्पात मचाने के बाद वापस लौटे किसान, देखें लाल किले का भयावह मंजर, पुलिसकर्मियों ने ऐसे बचाई अपनी जान

बिहार में साल 2006 में ही एपीएमसी एक्ट समाप्त हो गया था, अब किसान खुले बाजार में उपज बेचने के आदी हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि यहां के किसान का आंदोलन मक्के और धान की सही समय पर खरीददारी का होगा ना कि कृषि कानून का. उन्होंने हालांकि राजनीति के केंद्र बिंदु में कृषि आ रही है, इस पर संतोष जताते हुए कहा कि बिहार और पंजाब तथा हरियाणा के किसानों में तुलना करना बेकार की बात है. Also Read - Kisan Andolan: क्या सरकार की बात मानेंगे किसान..?, कृषि कानूनों को निलंबित रखने के प्रस्ताव पर किसान यूनियन की बैठक शुरू

इधर, कृषि बिल के विरोध में दिल्ली में हो रहे आंदेालन से बिहार के राजनीतिक दलों में सुगबुहाट होने लगी है. कृषि कानून के विरोध में सभी विपक्षी दल एकजुट होकर सत्ता पक्ष पर दबाव बना रहे हैं. बुधवार को पटना में भाकपा माले सहित अन्य वाम दलों के आह्वान पर प्रतिरोध सभा आयोजित की गई तथा प्रधानमंत्री का पुतला फूंका गया. इस कार्यक्रम में भाकपा-माले, भाकपा और सीपीएम के अलावा राजद के नेताओं ने भी भाग लिया.

Source: IANS Hindi