पटना: बिहार का उत्तरी हिस्सा पिछले करीब एक पखवाड़े से बाढ़ से बेहाल है. कई सड़कें पानी से लबालब भरी हैं तो खेत जलमग्न हो गए हैं. घरों के भीतर पानी बह रहा है तो बाजार और गलियां बंद हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोग या तो ऊचें स्थानों पर शरण लिए हुए हैं या फिर अपने घरों में ‘कैद’ होकर रह गए हैं. राज्य में कई प्रमुख नदियां अभी भी खतरे के निशान से उपर बह रही है. इस बीच, बिहार के मुख्यमंत्री बाढ़ से उपजी स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं.

बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि बिहार के 13 जिले शिवहर, सीतामढी, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, दरभंगा, सहरसा, सुपौल, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार और पश्चिम चंपारण में अब तक बाढ़ से 127 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 82 लाख 83 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. जल संसाधान विभाग के प्रवक्ता अरविंद कुमार ने बताया कि कोसी के जलस्तर में वीरपुर बैराज के पास शुक्रवार की तुलना में शनिवार को कमी आई है परंतु बागमती, बूढ़ी गंडक, कमला बलान, अधवारा समूह की नदियां, खिरोई तथा महानंदा राज्य के विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.

इधर, कोसी के जलस्तर पर भले ही कमी हो परंतु कोसी की तेज धारा से सुपौल जिले के कई गांवों में कटाव का खतरा उत्पन्न हो गया है. कटाव के डर से लोग घर छोड़ रहे हैं. कटिहार, सुपौल और अररिया सहित अन्य जिलों में बाढ़ की हालत गंभीर बनी हुई है. पश्चिम चंपारण में लौरिया-नरकटियागंज पथ डायवर्जन टूट जाने से आवगमन ठप्प है. कटिहार की कई सड़कों पर पानी आ जाने के कारण आवागमन ठप्प है. नेपाल से फिर पानी छोड़े जाने के कारण बागमती नदी के साथ कमला नदी में फिर से जलस्तर बढ़ने की आशंका है. इसको लेकर दरभंगा में जिला प्रशासन के जिलाधिकारी ने स्थिति को क्रिटिकल मानते हुए लोगों को सावधान किया है तथा सभी सरकारी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है.

इस बीच, बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी है. बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने आईएएनएस को बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को बाढ़ प्रभवित सभी जिलाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बाढ़ से निपटने के लिए चलाए जा रहे कायरें और बाढ़ पीड़ितों को पहुंचाए जा रहे राहत कार्यों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ित परिवारों के बैंक खातों में छह-छह हजार रुपये भेजे जा रहे हैं. बाढ़ प्रभावित इन 13 जिलों के 1243 ग्राम पंचायतों में राहत शिविर चलाए जा रहे हैं तथा बाढ़ पीड़ितों के खाने के लिए 888 सामुदायिक रसोइयां चलाई जा रही हैं. बाढ़ से अब तक 127 लोगों की मौत हो चुकी है. एनडीआरएफ की 27 कंपनियां बाढ़ प्रभवित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं.