नई दिल्ली. एक दिन पहले केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा के रामगढ़ के मॉब-लिंचिंग के आरोपियों का सम्मान करने के बाद, अब केंद्र की मोदी सरकार के एक और मंत्री- गिरिराज सिंह ने सांप्रदायिक हिंसा फैलाने के एक आरोपी के परिवार से मुलाकात की. यही नहीं, केंद्रीय मंत्री ने आरोपी के परिजनों से मुलाकात के बाद यह भी कहा कि ये लोग हमेशा से शांति व्यवस्था कायम करने के लिए काम करते रहे हैं. आप इन्हें दंगाई कैसे कह सकते हैं? एक के बाद एक केंद्रीय मंत्रियों के हिंसा के आरोपियों से मुलाकात की इन खबरों से सियासत गर्मा गई है. बिहार के नवादा जिले में इसी साल मार्च में एक प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने के बाद दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जिस आरोपी के परिजनों से मुलाकात की, वह इसी मामले का संदिग्ध है.

गिरिराज ने आरोपी का किया बचाव
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री और नवादा से सांसद गिरिराज सिंह ने जिले में सांप्रदायिक हिंसा फैलाने के आरोपी के परिजनों से मुलाकात के बाद प्रशासन द्वारा इन लोगों को मामले का आरोपी बनाने पर भी सवाल उठाया. केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘इन लोगों ने हमेशा जिले में शांति स्थापना बनाए रखने में मदद की है. किसी भी स्थिति में सामाजिक माहौल बिगड़े नहीं, इसका ख्याल रखा है. आप इन्हें दंगा फैलाने वाला कैसे कह सकते हैं.’ इसी साल मार्च में नवादा में फैली सांप्रदायिक हिंसा के बाद जिला प्रशासन द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर उन्होंने कहा, ‘प्रशासन को इस बात की जांच करनी चाहिए कि क्या हिंसा को फैलाने में इन लोगों का हाथ है.’ बता दें कि केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने बीते दिनों झारखंड के रामगढ़ जिले में एक साल पहले मीट कारोबारी की पीट-पीटकर हत्या कर देने वाले आठ आरोपियों का सम्मान किया था. इसको लेकर विपक्षी दलों ने मंत्री की तीखी आलोचना की थी. वहीं जयंत सिन्हा के पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने भी बेटे की निंदा की थी.

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रामनवमी के मौके पर कई जिलों में हुई थी हिंसा
इसी साल मार्च महीने के आखिरी सप्ताह में बिहार में रामनवमी जुलूस के दौरान कई जिलों में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुई थीं. औरंगाबाद में सबसे पहले सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ. इसके बाद समस्तीपुर, मुंगेर, नालंदा, शेखपुरा और गया जिले में भी ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं. वहीं, उत्तर बिहार के महत्वपूर्ण जिले, दरभंगा में भी सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं हुईं. इसी दौरान 30 मार्च को नवादा में कथित तौर पर एक मूर्ति के तोड़े जाने के बाद दो समुदाय आमने-सामने आ गए. यहां के एनएच 31 के नजदीक बाबा ढाबा के पास दोनों समुदायों के बीच जमकर रोड़ेबाजी हुई. उपद्रवियों की भीड़ ने बाद में कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की वारदातों को अंजाम दिया. इन घटनाओं में करीब 60 लोग घायल हो गए थे. वहीं 20 पुलिसकर्मियों को चोटें आई थीं.

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