नई दिल्ली: राजनीति में एंट्री की दो नाकाम कोशिश के बाद के ब्रजेश ठाकुर ने अपने बेटे और बेटी के साथ कई भाषाओं में तीन न्यूजपेपर निकालने शुरू किए. इन अखबारों का संपादक उसने अपने बच्चों को बना दिया और एनजीओ के फिल्ड में उतर गया. पांच साल पहले उसे सरकारी कॉन्ट्रैक्ट मिला और शुरू हुआ ब्रिजेश ठाकुर का सफर. ब्रिजेश ठाकुर ने 1995 और 2000 में मुजफ्फरपुर से विधानसभा का चुनाव लड़ा. दोनों ही मौकों पर उसे बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा. 1995 में उसे सिर्फ 200 वोट मिले. इसके बाद उसने अपने पिता के अखबार पर फोकस करना शुरू कर दिया.

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दो दशक पहले ही ठाकुर को प्रेस सूचना ब्यूरो से मान्यता मिल गई थी. ठाकुर ने 2012 में दो और न्यूजपेपर शुरू किए.अंग्रेजी में न्यूजनेक्स और उर्दू में हालत-ए-बिहार शुरू किया और इन अखबारों का संपादक अपने बेटे और बेटी को बनाया. 2013 में ब्रजेश ठाकुर ने एनजीओ सेवा संकल्प और विकास समिति की शुरुआत की. इसी साल इस एनजीओ को बिहार सरकार की ओर से चाइल्ड शेल्टर होम चलाने का काम मिल गया.

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ठाकुर के घर में ही प्रिंटिंग प्रेस है. मीडिया रिपोर्टों का दावा किया गया है कि ब्रजेश के स्वामित्व वाले हिंदी दैनिक की 300 से अधिक प्रतियां प्रकाशित नहीं होती हैं लेकिन प्रतिदिन इसके 60,862 प्रतियां बिक्री दिखाया गया था जिसके आधार पर उसे बिहार सरकार से प्रति वर्ष करीब 30 लाख रुपये के विज्ञापन मिलते थे.

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सेल्टर होम की जांच करने वाली कमेटी में साल 2015 तक 5 लोग थे जिनमें तीन महिलाएं भी थीं लेकिन 2015 के बाद इस कमेटी में केवल तीन पुरुष ही बच गए. सीबीआई का कहना है कि कोई सर्वे नहीं किया गया. कमेटी का चेयरमैन दिलीप वर्मा फरार है. एक सदस्य विकास कुमार जेल में है. स्थानीय चाइल्ड प्रोटक्शन ऑफिसर भी इस अपराध को छिपाने के आरोप में जेल में है. सीबीआई को ठाकुर का सेल्टर होम चलाने वाली महिला मधु की तलाश है.

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बिहार के मुजफ्फरपुर में स्थित शेल्टर होम में 29 लड़कियों के साथ बलात्कार और यातना के मुख्य आरोपी ब्रिजेश ठाकुर की गिरफ्तारी के बाद बिहार की नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू और बीजेपी गठबंधन की सरकार सवालों के घेरे में है. सरकार बिना किसी जांच के उसके अखबार को विज्ञापन और एनजीओ को फंड देती रही.

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जेडीयू के सीनियर नेता केसी त्यागी का कहना है कि ब्रजेश ठाकुर का जेडीयू से कोई लेनादेना नहीं है. वह हमारी पार्टी का सदस्य भी नहीं है. इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में केसी त्यागी ने कहा कि मामला सामने आने के बाद सरकार ने तुरंत ब्रजेश ठाकुर को गिरफ्तार किया. पिछले दो महीने से वह जेल में है. नीतीश कुमार कभी भी इस तरह के व्यक्ति की पैरवी नहीं करत और न ही बचाने की कोशिश करते हैं.