नई दिल्ली. बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जलवा कायम है. ऐसा उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड यानी जेडीयू दावा करती है. लेकिन शनिवार को पार्टी के जिला कार्यकर्ता सम्मेलन में पहुंचे समर्थकों (खासकर मुस्लिम कार्यकर्ता) की बहुत कम तादाद को देखकर तो लग रहा है कि जेडीयू के प्रति अब भरोसा कम होता जा रहा है. यह हम नहीं कह रहे, बल्कि शनिवार को पटना में हुए जदयू के जिला कार्यकर्ता सम्मेलन में पार्टी कार्यकर्ताओं की कम मौजूदगी से बनी स्थिति को देख सामने आया है. दरअसल, जेडीयू ने जिला कार्यकर्ता सम्मेलन में मुस्लिम कार्यकर्ताओं की आमद को देखते हुए 600 किलो मटन-बिरयानी का इंतजाम किया था. लेकिन सम्मेलन में सिर्फ 500 कार्यकर्ता ही पहुंचे. इस कारण बिहार के सियासी हलकों में यह चर्चा अब तेज हो गई है कि अल्पसंख्यकों के बीच जदयू का अब वह ‘क्रेज’ नहीं रहा.

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मजदूरों में बांटनी पड़ी बिरयानी
श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित जेडीयू के जिला कार्यकर्ता सम्मेलन के बारे में पार्टी के एक कार्यकर्ता ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मटन-बिरयानी का इंतजाम बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को लुभाने के लिए ही किया गया था. पार्टी को उम्मीद थी कि बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचेंगे. लेकिन सम्मेलन शुरू होने के बाद कार्यकर्ताओं की कम आमद से पार्टी के पदाधिकारियों के माथे पर बल पड़ने लगे. आखिरकार बड़ी मात्रा में पकाई गई बिरयानी बिन बुलाए मेहमानों और आसपास के मजदूरों के बीच ही बांट दी गई. कार्यकर्ता और खासकर मुस्लिम समुदाय के बीच जदयू के समर्थकों की संख्या में आई इस कमी से पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी चिंतित हैं. सरकार और पार्टी के तमाम दावों के बीच की यह हकीकत सर्दी के मौसम में भी उनके पसीने छुड़ाने वाली है.

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वरिष्ठ नेता को आधे भाषण पर ही बैठाया
जदयू कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान सिर्फ कार्यकर्ताओं की कम संख्या ही पार्टी के लिए चिंता का कारण नहीं है, बल्कि पिछले कुछ दिनों में प्रदेश के 30 अलग-अलग जिलों में हुए पार्टी कार्यक्रमों के दौरान भी समर्थकों की कम तादाद में उपस्थिति से जदयू के वरिष्ठ नेता चिंतित हैं. अखबार के अनुसार, पिछले एक पखवाड़े के दौरान बिहार के विभिन्न जिलों में हुए पार्टी के कार्यक्रमों में जदयू के वरिष्ठ नेता- राज्यसभा सांसद कहकशां परवीन, वरिष्ठ नेता गुलाम गौस, माइनॉरिटी सेल के अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद गुलाम रसूल बलियावी आदि मौजूद रहे. लेकिन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार किसी भी कार्यक्रम में 1500 से ज्यादा कार्यकर्ता नहीं पहुंचे. यही नहीं, पार्टी के संगठन सचिव और वरिष्ठ नेता आरसीपी सिंह के साथ तो और बुरा हुआ. एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें आधा भाषण देकर ही बैठना पड़ा. क्योंकि मंच के सामने उपस्थित श्रोताओं में से किसी ने कह दिया, ‘बस हो गया अब’. अखबार के अनुसार पार्टी नेताओं के प्रति कार्यकर्ताओं का यह व्यवहार निश्चित रूप से चिंता में डालने वाला है.

संगठन के स्तर पर कमी को दोष दे रहे नेता
पटना में हुए पार्टी सम्मेलन के दौरान कार्यकर्ताओं की कम मौजूदगी के कारण गिनाने की बात पर जदयू के नेता कई कमियों की ओर इशारा कर रहे हैं. पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने अखबार से बातचीत में कहा कि संगठन स्तर पर कुछ कमी रही, जिसके कारण जिला सम्मेलन में कार्यकर्ताओं की कम संख्या देखी गई. इसके अलावा सम्मेलन के दौरान बुनियादी सुविधाओं के अभाव की वजह से भी कम संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे. लेकिन इसे अल्पसंख्यकों के बीच जदयू की घटती लोकप्रियता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. क्योंकि जदयू ने मुसलमानों के कल्याण और उनके समुदाय के बीच शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं. बहरहाल, जदयू प्रवक्ता और नेता भले लाख दावे करें, लेकिन पार्टी के कार्यक्रमों के प्रति अल्पसंख्यकों का घटता रुझान, जदयू के लिए निश्चित तौर पर चिंता वाली बात है. क्योंकि सीएम नीतीश कुमार के महागठबंधन से अलग होने के बाद बन रही यह स्थिति, आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए नकारात्मक संकेत के रूप में सामने आ रही है.