नई दिल्ली. मैथिली साहित्य महासभा- मैसाम (MAISAM) के चौथे विद्यापति स्मृति व्याख्यानमाला के तहत मैथिली लोक साहित्य और दलित विमर्श विषय पर दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया. इस मौके पर मैथिली की युवा कवयित्री स्वाती शाकंभरी को तीसरा मैसाम युवा सम्मान-2018 दिया गया. स्वाती को यह सम्मान उनकी पुस्तक कविता संग्रह ‘पूर्वागमन’ के लिए दिया गया. मैथिली भोजपुरी अकादमी के सहयोग से हुए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. मंत्रेश्वर झा ने की, जबकि मैथिली के मूर्धन्य साहित्यकार डॉ. महेंद्र नारायण राम ने इस अवसर पर व्याख्यान दिया. कार्यक्रम में तीसरे विद्यापति स्मृति व्याख्यान पर आधारित एक पुस्तिका का विमोचन भी किया गया. इस पुस्तिका का संपादन संस्था के उपाध्यक्ष विनीत उत्पल ने किया है. कार्यक्रम के आयोजन में दीपक फाउंडेशन ने भी सहयोग किया.

विश्व में मिली है लोक साहित्य को मान्यता
विद्यापति स्मृति व्याख्यानमाला कार्यक्रम में दिए गए अपने व्याख्यान में डॉ. महेंद्र नारायण राम ने कहा कि साहित्य का मूल रूप समाज होता है. यहां किसी की जाति मायने नहीं रखती है. अपने संबोधन में डॉ. राम ने कहा, ‘दलित के बारे में संविधान ने कहा है कि छुआछूत वाले लोग दलित माने जाते हैं. जिसे गंदा समझा जाता है. दलित शब्द आधुनिक है, लेकिन दलित परंपरा प्राचीन है. कभी दो परिपाटी थी, वेदपाठी और लोकपाठी. लोकपाठी में दलित थे.’ उन्होंने कहा, ‘विश्वभर में लोक साहित्य को मान्यता दी गई है, इसी से दलित साहित्य को भी मान्यता मिली. दलित साहित्य काफी समृद्ध रहा है. मैथिली दलित समाज, साहित्य और लोकगीत दुनिया के किसी भी दलित समाज से समृद्ध रहा है.’

स्वाती ने पिता को दिया सफलता का श्रेय
तीसरे मैसाम सम्मान से नवाजी गई कवयित्री स्वाती शाकंभरी ने इस मौके पर कहा कि हर व्यक्ति के अंदर प्रतिभा छिपी होती है, बस उसे सही समय पर निखारना होता है. मैसाम सम्मान पाने की सफलता का श्रेय अपने पिता को देते हुए स्वाती ने कहा, ‘यह सौभाग्य की बात है कि मुझे वह माहौल मिला और साहित्य अकादमी के रूप में मुझे पहला मंच मिल सका.’ मैथिली भाषा के प्रति अपने अनुराग को दर्शाते हुए उन्होंने कहा कि मां, मातृभाषा और मातृभूमि का जो लोग ध्यान रखें, उन्हें सफल होने से कोई ताकत नहीं रोक सकती. इस मौके पर मैथिली युवा सम्मान-2018 की जूरी में शामिल निवेदिता झा और कुमकुम झा ने भी युवा सम्मान के लिए स्वाती के चयन को लेकर अपने विचार रखे. जूरी सदस्यों ने कहा कि स्वाती की कविता समाज को संदेश देती है.

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दलित लिखेगा तो सत्य ही लिखेगा
विद्यापति स्मृति व्याख्यानमाला कार्यक्रम में मैथिली भोजपुरी अकादमी के डॉ. चंदन झा ने दिल्ली सरकार की ओर से अपना मंतव्य पेश किया. उन्होंने इस मौके पर कहा कि दलित साहित्य यदि दलित लिखेगा तो वह सत्य ही लिखेगा. मराठी से दलित साहित्य का उद्भव हुआ, लेकिन मैथिली में दलित चिंतन अधिक नहीं हो पाया. ऐसे में वरिष्ठ लेखक डॉ. महेंद्र नारायण राम के विचार हमारा मार्गदर्शन करेंगे. इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत गोसाउनी गीत से हुई. इसके बाद मैसाम के अध्यक्ष अमरनाथ झा ने स्वागत भाषण दिया. अपने भाषण में अमरनाथ झा ने संस्था की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी. कार्यक्रम के अंत में संस्था के उपाध्यक्ष श्रीचंद कामत ने धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम का संचालन डॉ. विभा कुमारी और कंत शरण ने किया. इस मौके पर मैथिली साहित्य महासभा के सभी कार्यकर्ता और मैथिल साहित्यप्रेमी मौजूद थे.