पटना| लालू का साथ छोड़ बीजेपी के समर्थन से एक बार फिर मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार ने शनिवार को 27 मंत्रियों के साथ अपने मंत्रिमंडल का गठन किया जिसमें जदयू से 14, भाजपा से 12 और एक लोजपा से है. नीतीश के मंत्रिमंडल में अपनी पार्टी को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने की वजह से पूर्व मुख्यमंत्री और हम के नेता जीतन राम मांझी और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के उपेंद्र कुशवाहा खुश नहीं हैं.Also Read - चिराग पासवान ने 'जहरीली शराब' को लेकर राज्यपाल को लिखी चिट्ठी, बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की

ऐसा भी बताया जा रहा है कि अपनी शिकायत को लेकर मांझी दिल्ली गए. दरअसल, मांझी ने खुद मंत्री बनाने से इंकार कर दिया था मगर वह चाहते थे कि उनकी पार्टी से किसी एक को नीतीश की कैबिनेट में जगह मिले. नीतीश कुमार ने मांझी की मांग को यह कहकर ख़ारिज कर दिया था कि वह किसी ऐसे व्यक्ति को कैबिनेट में शामिल नहीं करेंगे जो सदन का हिस्सा नहीं है. मगर एलजेपी के पशुपति पारस को बिना किसी सदन का सदस्य होते हुए नीतीश कैबिनेट में शामिल कर लिया गया, जिसके बाद दोनों सहयोगी नाराज़ हैं. Also Read - Bihar में बढ़ाई गई कोरोना पाबंदियां, 6 फरवरी तक लागू रहेंगे सभी मौजूदा प्रतिबंध; जानें क्या बोले नीतीश कुमार

वहीं, उपेंद्र कुशवाहा द्वारा सुझाये नाम को भी नितीश ने मंत्रिमंडल में मौका नहीं दिया जिससे वे भी खफा है. वह भी बीजेपी के शीर्ष नेताओं से इस बात की शिकायत करने वाले हैं. Also Read - Bihar Liquor News: बिहार में शराबबंदी कानून में ढील की तैयारी में नीतीश सरकार! पहली बार शराब के साथ पकड़े गए तो सिर्फ...

आपको बता दें कि 2014 आम चुनावो में जेडीयू को मिली हार के बाद नीतीश कुमार ने पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था. उन्होंने अपनी जगह जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था. मगर कुछ समय बाद मांझी के काम से नाखुश नीतीश ने फिर से मुख्यमंत्री पद संभाल लिया.

मांझी ने भी जेडीयू का दामन छोड़कर अपनी पार्टी बनाई मगर उनको लोगों का समर्थन नहीं मिला.