नई दिल्ली: तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की जीत ने बिहार में पार्टी की मुश्किल बढ़ा दी है. बीजेपी, जेडीयू, एनसीपी और आरजेडी के बागी नेता कांग्रेस में शामिल होना चाहते हैं. अपनी पार्टियों से नाराज चल रहे नेताओं के लिए कांग्रेस पसंदीदा पार्टी बन गई है. ये नेता इसलिए भी कांग्रेस से उम्मीद लगाए बैठे हैं क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तीन फरवरी को पटना में हुई ‘जन आकांक्षा रैली’ में कहा था कि कांग्रेस पार्टी बैकफुट पर नहीं फ्रंटफुट पर खेलने वाली है. राहुल ने कहा था कि तेजस्वी और लालू जी के साथ मिलकर कांग्रेस बिहार में फ्रंटफुट पर खेलेगी और हम छक्का मारेंगे. पटना के गांधी मैदान में कांग्रेस ने 28 वर्षों के बाद अपने दम पर किसी रैली का आयोजन किया था.

बिहार में कांग्रेस के पास नेता ही नेता
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस जहां नेताओं की कमी से जूझ रही है, वहीं बिहार में कई नेता कांग्रेस में शामिल होना चाहते हैं. पार्टी को नेताओं की तरफ से कई आवेदन मिल रहे हैं. बिहार में कांग्रेस की स्थिति तेजी से बदली है. एक साल पहले तक पार्टी को राज्य में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के लिए कोई नेता नहीं मिल रहा था और अब नेताओं की होड़ लग गई है. वे नेता जो कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं, उनमें पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी के बागी सांसद कीर्ति आजाद, शत्रुघ्न सिन्हा, पूर्व बीजेपी एमपी उदय सिंह और बाहुबली अनंत सिंह हैं. जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव के भी पार्टी में शामिल होने की अटकलें हैं. पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन इस समय कांग्रेस की सांसद हैं.

ये नेता हुए शामिल
ललित नारायण मिश्रा के पोते व जेडीयू नेता ऋषि मिश्रा शनिवार को कांग्रेस में शामिल हो गए. हाल ही में पूर्व सांसद आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद और एनसीपी नेता तारिक अनवर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं. इनमें से अधिकांश नेता सवर्ण जातियों से आते हैं. ऋषि मिश्रा और कीर्ति आजाद ब्राह्मण हैं, जबकि उदय सिंह और लवली आनंद राजपूत हैं. अनंत सिंह भूमिहार और शत्रुघ्न सिन्हा कायस्थ समाज से आते हैं. ऊंची जाति के नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों से कांगेस की गठबंधन सहयोगी आरजेडी के लिए मुश्किल हालात पैदा हो सकते हैं. बिहार में आरजेडी महागठबंधन की धुरी है. पार्टी को लगता है कि कांग्रेस में उच्च जाति के नेताओं का भारी तादाद में शामिल होना उसके कोर वोट बैंक रहे ओबीसी और दलित वोटर्स को कंफ्यूज कर सकता है.

आरजेडी करेगी समझौता?
दूसरी मुश्किल सीटों के बंटवारे को लेकर है. कांग्रेस पार्टी में शामिल होने वाले सारे नेता टिकट चाहते हैं. विधायक अनंत सिंह पहले ही मुंगेर लोकसभा सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ने का एलान कर चुके हैं. गठबंधन में यह सीट आरजेडी के पास है. हालांकि सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी यादव इस सीट से अनंत सिंह के चुनाव लड़ने पर राजी हो गए हैं.

लवली आनंद शिवहर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहती हैं. गठबंधन में यह सीट भी आरजेडी के खाते में है. वहीं आजाद दरभंगा से चुनाव लड़ना चाहते हैं. इस सीट पर गठबंधन में शामिल दो अन्य पार्टियां भी दावा कर रही हैं. आरजेडी और मुकेश साहनी की विकासशील इंसान पार्टी इस सीट से टिकट चाहती है. इस सीट को लेकर साहनी और आजाद में जुबानी जंग चल रही है.

पप्पू यादव या शरद यादव?
JAP नेता पप्पू यादव सार्वजनिक रूप से कांग्रेस का समर्थन कर चुके हैं. पटना के गांधी मैदान में आयोजित कांग्रेस की रैली आयोजित करने में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी. यादव माधेपुरा से लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं. ये सीट जेडीयू के पूर्व नेता शरद यादव की सीट रही है. वो भी इस सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं.