नई दिल्ली. लोगों के घरों की दीवारों, मीटिंग हॉल, ट्रेनों-स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों के बाद मिथिला पेंटिंग या मधुबनी पेंटिंग के नाम से विख्यात, बिहार के मिथिला की चित्रकला अब प्रदेश के मुख्यमंत्री आवास तक पहुंच गई है. बिहार के मुख्यमंत्री आवास पहुंचने वाला कोई भी व्यक्ति अब दुनियाभर में विख्यात लोक कला मधुबनी पेंटिंग की विविध कलाकृतियों को देख यहां की प्राचीन कला-संस्कृति से न केवल रूबरू होगा, बल्कि उनकी बारिकियों को भी समझेगा. पटना के 1 अणे मार्ग मुख्यमंत्री आवास परिसर की दीवारों पर भी मधुबनी पेंटिंग बनाई गई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पेंटिंग की तस्वीर टि्वटर पर साझा भी की है. बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र खासकर दरभंगा और मधुबनी के अलावा नेपाल के कुछ क्षेत्रों में मधुबनी पेंटिंग की खास पहचान है. रंगोली के रूप में शुरू हुई यह कला धीरे-धीरे आधुनिक रूप में कपड़ों, दीवारों एवं कागज पर उतर आई है.

पटना के विद्यापति भवन की दीवारों पर भी पेंटिंग
बिहार के मधुबनी स्टेशन परिसर को मधुबनी पेंटिंग से सजाने-संवारने के बाद गांव के कलाकर अब राजधानी पटना तक की दीवारों पर अपनी कला को उकेर कर उन्हें खूबसूरत बनाने में जुटे हैं. पटना स्थित प्रसिद्घ विद्यापति भवन की दीवारों पर भी कलाकार मधुबनी पेंटिंग उकेर कर इस भवन की रौनक बढ़ा रहे हैं. मधुबनी पेंटिंग को बिहार की गलियों और घरों तक पहुंचाने का संकल्प लिए स्वयंसेवी संस्था ‘क्राफ्टवाला’ के कलाकार अब राजधानी पटना पहुंचे हैं. पटना के विद्यापति मार्ग स्थित चेतना समिति के विद्यापति भवन में मिथिला चित्रकला की आर्ट गैलरी का निर्माण ‘क्राफ्ट विलेज’ जितवारपुर से आए कलाकारों की टीम द्वारा किया जा रहा है. राकेश झा कहते हैं कि क्राफ्टवाला की टीम ने मधुबनी पेंटिंग को जगह-जगह बढ़ाने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि इसके तहत मधुबनी स्टेशन से मधुबनी पेंटिंग की शुरुआत की गई थी, उसे देखकर लोग अब कई स्थानों पर मधुबनी पेंटिंग बनाने लगे हैं.

1 अणे मार्ग पर मिथिला पेंटिंग बनाने वाले कलाकारों के साथ सीएम नीतीश कुमार.

1 अणे मार्ग पर मिथिला पेंटिंग बनाने वाले कलाकारों के साथ सीएम नीतीश कुमार.

 

कोहबर से लेकर लोक गाथा तक की झलक
क्राफ्टवाला के संस्थापक राकेश झा बताते हैं, ‘इस कार्य का उद्देश्य विद्यापति भवन में मधुबनी पेंटिंग के परम्परागत स्वरूप को प्रदर्शित करना है. इसके तहत मिथिला क्षेत्र के लोक संस्कारों जैसे विवाह, मुंडन, जनेऊ आदि में प्रयुक्त विभिन्न प्रकार के अल्पना (अरिपन), कोहबर (कोबर), सीतायन (सीता का जीवन चरित्र), लोक नायकों की गाथा आदि का चित्रण मधुबनी पेंटिंग शैली में किया जा रहा है.’ उन्होंने कहा कि चेतना समिति वर्षों से मिथिला की लोक कला संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रयत्नशील रही है. चेतना समिति के उमेश मिश्र बताते हैं कि विद्यापति भवन को मधुबनी पेंटिंग से सजाने का उद्देश्य आने वाली पीढी को मिथिला पेंटिंग से केवल रूबरू कराना है. विद्यापति भवन में क्राफ्टवाला के प्रोजेक्ट प्रमुख कौशल कहते हैं, ‘विद्यापति भवन की दीवारों पर करीब 20 कलाकारों द्वारा मधुबनी पेंटिंग बनाई जा रही हैं. भवन में विद्यापति के चित्रण के अलावे राम-सीता, राधा-कृष्ण और बिहार के अन्य संस्कृतियों को भी चित्र के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा.’

बहुत प्राचीन है मिथिला पेंटिंग की परंपरा
विद्यापति भवन की दीवारों में पेंटिंग करने में जुटी कलाकार रेणु देवी कहती हैं, इस कार्य से न केवल अपनी कला दिखाने का अवसर मिलता है बल्कि मधुबनी पेंटिंग को भी राज्य के लोगों तक पहुंचाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में महाकवि विद्यापति और मिथिला लोक नृत्य, मिथिला लोककलाओं को भी प्रदर्शित किया जा रहा है. मधुबनी पेंटिंग को मिथिला पेंटिंग भी कहा जाता है. किंवदंतियों के मुताबिक यह कला मिथिला नरेश राजा जनक के समय से ही मिथिलांचल में चली आ रही है. आधुनिक समय में मधुबनी चित्रकला को पहचान बिहार के मधुबनी जिले के जितवारपुर गांव की रहने वाली सीता देवी ने दिलाई. इस गांव की तीन कलाकारों जगदंबा देवी, सीता देवी और बौआ देवी को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. मिथिला की महिलाओं द्वारा शुरू की गई इस घरेलू चित्रकला को पिछले कुछ दशकों में पुरुषों ने भी अपना लिया है.

देश के सबसे गंदे स्टेशनों में से एक मधुबनी बना भारत का दूसरा सबसे खूबसूरत स्टेशन

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महज 10 दिन में चमक उठा मधुबनी स्टेशन
मुख्यमंत्री आवास और विद्यापति भवन से पहले मिथिला पेंटिंग से जुड़े कलाकारों ने उत्तर बिहार के मधुबनी स्टेशन पर इस चित्रकला को उकेरकर इस स्टेशन को देश के खूबसूरत स्टेशनों में से एक का दर्जा हासिल कराया है. बड़ी संख्या में महिला-पुरुष कलाकारों ने दिन-रात की मेहनत से महज 10 दिनों के भीतर मधुबनी स्टेशन को देश के सबसे गंदे स्टेशनों की सूची से निकालकर, सबसे सुंदर स्टेशनों की लिस्ट में पहुंचाया है. मधुबनी स्टेशन की इस सफलता के पीछे मिथिला पेंटिंग का ही योगदान है. मधुबनी स्टेशन पर पेंटिंग करने वाले कलाकारों ने बताया कि उन्होंने लोक कला के संवर्द्धन के लिए मेहनत की है. इसके लिए इन कलाकारों ने रेलवे से एक रुपया भी नहीं लिया. बता दें कि 2015-16 में सफाई और स्वच्छता को लेकर मधुबनी को देश के सबसे गंदे स्टेशन का दर्जा दिया गया था. लेकिन स्थानीय कला की बदौलत आज यह स्टेशन देशस्तर पर सराहना पा रहा है.