नई दिल्ली. दिल्ली के मावलंकर हॉल में रविवार को मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह का आयोजन किया गया. अखिल भारतीय मिथिला संघ के 51वां स्थापना दिवस पर हुए इस समारोह में बड़ी संख्या में मैथिल बंधुओं ने शिरकत की. इस मौके पर बतौर विशिष्ट अतिथि राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि मिथिला का इतिहास काफी पुराना है, विद्यापति से भी पुराना है. मिथिला के इतिहास में ऐसी विदुषियां हुई हैं जिन्होंने समाज को एक नई दिशा देने का काम किया है. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति हारुण राशीद ने कहा कि अखिल भारतीय मिथिला संघ हमेशा मिथिला के विकास को लेकर संघर्ष करता रहा है.

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फोटो साभारः @ccoi_1947

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मिथिला विभूति पर्व के दौरान मैथिली और मिथिला के लिए उल्लेखनीय सेवा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता पटना के पं. गोविन्द झा को ‘सर गंगानाथ झा सम्मान’, रायपुर (छत्तीसगढ़) के मनीष कुमार झा को ‘बाबू साहेब चौधरी सम्मान’ एवं प्रो. सुभाष चंद्र यादव को ‘भोगेन्द्र झा सम्मान’ से नवाजा गया. समारोह में प्रसिद्ध मैथिली गायक हरिनाथ झा एवं रंजना झा ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया. समारोह में जयप्रकाश ठाकुर ‘जनक’, अरविन्द सिंह तथा अन्य कलाकारों ने पारंपरिक मैथिली नृत्य एवं संगीत प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया.

इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत राज्यसभा के उप-सभापति हरिवंश नारायण सिंह ने दीप जलाकर की. अखिल भारतीय मिथिला संघ (रजि) के अध्यक्ष विजय चंद्र झा ने कहा, “हमें खुशी है कि अखिल भारतीय मिथिला संघ ने अलग अलग राज्य में रहकर भी मिथिला और मैथिली के उत्थान के लिए अभूतपूर्व योगदान देने वाले विभूतियों को सम्मानित किया.” विजय चंद्र झा ने कहा कि मिथिला के विकास में संघ हमेशा तत्पर रहा है. उन्होंने इस संबंध में राज्यसभा सांसद और कार्यक्रम के स्वागताध्यक्ष प्रभात झा के किए गए कार्यों की सराहना की. सम्मान समारोह में राज्यसभा के उप-सभापति हरिवंश नारायण सिंह, हारुण रशीद कार्यकारी सभापति, बिहार विधान परिषद्, हुकुमदेव नारायण यादव, महाबल मिश्र, अजय नारायण झा, सीके मिश्र, प्रिय रंजन झा, गंगेश मिश्र, मनोज झा एवं विनोद मिश्र को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया. कार्यक्रम को रामलखन राम रमण, सुमन कुमार महासेठ ने भी संबोधित किया.

(इनपुट – एजेंसी)