नई दिल्ली. बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) में चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों की मौत का आंकड़ा बुधवार को 112 पर पहुंच गया. इनमें से 93 बच्चों की मौत जहां SKMCH में हुई है, वहीं एक अन्य हॉस्पिटल में AES (Acute Encephalitis Syndrome) से पीड़ित 19 बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. पिछले एक पखवाड़े से हो रही बच्चों की मौतों को लेकर जहां एक तरफ राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर है, वहीं अस्पताल के डॉक्टर भी नेताओं और उनके समर्थकों से परेशान हैं. इसके मद्देनजर SKMCH के अधीक्षक डॉ. एसके शाही ने बुधवार को नेताओं और उनके समर्थकों को खरी-खरी सुनाई. डॉ. शाही ने दोटूक शब्दों में कहा कि राजनीतिक दलों के नेता अस्पताल में आकर भीड़ न बढ़ाएं, बल्कि उन जगहों पर जाएं जहां बच्चे बीमार हैं. ये नेता उन जगहों पर जाकर लोगों को जागरूक करें, ताकि अन्य बच्चों को चमकी बुखार से बचाया जा सके.

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SKMCH के अधीक्षक डॉ. सुनील कुमार शाही ने मीडिया के साथ बातचीत के दौरान राजनीतिक दलों के नेताओं और उनके समर्थकों को यह हिदायत दी. डॉ. शाही ने कहा, ‘मेरा सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और उनके समर्थकों से विनम्र आग्रह है कि वे अस्पताल न आएं. यहां इनकी कोई जरूरत नहीं है. इन नेताओं को उन जगहों पर जाना चाहिए जहां पर बच्चे बीमार हैं. ये नेता उन स्थानों पर जाकर जागरूकता अभियान चलाएं ताकि अन्य बच्चों को भी एईएस जैसी खतरनाक बीमारी से बचाया जा सके. मेरा आग्रह है कि ये अस्पताल में आकर भीड़ न बढ़ाएं.’

डॉ. शाही ने अस्पताल में भर्ती बच्चों की हालत को लेकर भी अपडेट जानकारी मीडिया के सामने रखी. उन्होंने कहा, ‘अस्पताल के बाल रोग आईसीयू में किसी भी बच्चे को जमीन पर नहीं लिटाया गया है, बल्कि एक बेड पर दो से तीन बच्चों को रखकर उनका इलाज किया जा रहा है. श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के रिकवरी वार्ड में 40 बेड हैं और यहां भर्ती बच्चों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है. 57 से ज्यादा बच्चे अभी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 40 बीमार बच्चों को आज शाम तक छुट्टी दे दी जाएगी. इसके बाद अस्पताल की व्यवस्था पटरी पर लौट आएगी.’

बिजली न रहने से मरीज परेशान
मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एईएस से पीड़ित बच्चों को न सिर्फ इलाज की समस्या से जूझना पड़ रहा है, बल्कि अस्पताल में बार-बार बिजली कटौती के कारण भीषण गर्मी का कहर भी उनको झेलना पड़ रहा है. एईएस या अन्य रोगों से पीड़ित कई मरीजों के परिजनों ने कहा कि अस्पताल में नियमित तौर पर बिजली कटौती हो रही है. कई बार इसको लेकर शिकायत भी की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती. अस्पताल में बिजली की कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं है, जिसके कारण मरीजों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. गर्मी के कारण बच्चे रोते रहते हैं, लेकिन उनके साथ मौजूद मां या अन्य परिजन चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं. मरीजों के तीमारदार हाथ वाला पंखा लाकर परेशानी दूर करने का प्रयास करते हैं, लेकिन गर्मी इतनी ज्यादा है कि इसका भी कोई असर नहीं पड़ता.