नई दिल्ली. मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न कांड को लेकर सीएम नीतीश कुमार पर विपक्षी दलों का हमला जारी है. राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने आज एक बार फिर इस मामले को लेकर सीएम पर सवाल उठाया. तेजस्वी यादव ने बिहार के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के तबादले को मुजफ्फरपुर सेक्स स्कैंडल कांड से जोड़ते हुए हमला किया. तेजस्वी ने कहा कि राज्यपाल के तबादले के बाद बालिका गृह कांड के जांच अधिकारी और सीबीआई (CBI) के एसपी जे.पी. मिश्रा का भी तबादला हो गया है. यह जानते हुए भी कि एसपी जे.पी. मिश्रा 23 अगस्त को इस जांच की प्रगति रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करने वाले थे, उनका तबादला किए जाने पर सवाल उठता है. तेजस्वी ने सीएम नीतीश कुमार पर हमला करते हुए कहा है कि इस जघन्य कांड की आंच पटना तक पहुंच गई है. बता दें कि मुजफ्फरपुर में आश्रयगृह यौन शोषण मामले में प्रमुख आरोपी ब्रजेश ठाकुर सहित सभी 10 आरोपियों की न्यायिक रिमांड 12 सितंबर तक के लिए बढ़ा दी गई है. विशेष पोक्सो न्यायाधीश आर. पी. तिवारी ने बीते दिनों इस बाबत एक आदेश पारित किया था. इस दौरान सभी आरोपियों को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया था.

ब्रजेश की डायरी में ‘पटना सर’ पर पूछा सवाल
राजद नेता और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने मंगलवार को ट्वीट कर सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोला. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, ‘बिहार के राज्यपाल के बाद, सीएम नीतीश कुमार को सीबीआई एसपी के तबादले से मिली राहत. कल ही सीबीआई के एसपी को मुजफ्फरपुर शेल्टर होम यौन उत्पीड़न कांड की प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में जमा करनी है.’ तेजस्वी ने शेल्टर होम स्कैंडल की आंच पटना तक पहुंचने के बारे में लिखा है, ‘ब्रजेश ठाकुर की डायरी में ‘पटना सर (Patna Sir)’ नाम से किसी का जिक्र किया गया है. यानी कि मुजफ्फरपुर घटना की आंच पटना तक पहुंच गई है. चाचा, देखिए और इंतजार करिए कि कौन है ये आदमी.’ राजद नेता तेजस्वी यादव इससे पहले भी शेल्टर होम स्कैंडल को लेकर सीएम नीतीश कुमार पर बयान देते रहे हैं. हाल ही में उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार को शेल्टर होम स्कैंडल के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के साथ जदयू के संबंधों का खुलासा करना चाहिए.

बिहार के एक और मंत्री को लेकर भी विवाद
मुजफ्फरपुर शेल्टर होम स्कैंडल में बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के इस्तीफे के बाद सरकार के एक मंत्री और मुजफ्फरपुर के विधायक सुरेश शर्मा के भी इस कांड में शामिल होने की खबरें आई थीं. इस पर भी तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार को घेरे में लिया था. तेजस्वी ने बीते दिनों टि्वटर पर डाले गए अपने एक पोस्ट में कहा था, ‘नीतीश जी, आपकी बर्खास्त मंत्री कह रही हैं कि मुज़फ़्फ़रपुर के स्थानीय विधायक एवं मंत्री सुरेश शर्मा की भी मुज़फ़्फ़रपुर जन-बलात्कार कांड में संलिप्तता है. वह कह रही है हिम्मत है तो उसे हटाएं? सुरेश शर्मा को बर्खास्त क्यों नहीं कर रहे हैं? सब काम आप क्या विपक्ष के कहने से ही करेंगे?’ तेजस्वी ने सुरेश शर्मा के अलावा बिहार के पूर्व मंत्री दामोदर राउत पर भी कार्रवाई करने की मांग की थी. तेजस्वी ने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा था, ‘नीतीश जी, आपके कुछ मंत्रियों, नजदीकियों और अधिकारियों ने जिस प्रकार अनाथ बच्चियों के साथ संस्थागत दुष्कर्म किया और करवाया क्या यह जानकर आप असहज अनुभव नहीं करते? क्या आपमें इतनी भी संवेदनशीलता नहीं बची कि आप उन गुनाहगारों को बचाने वाले दोषी अधिकारियों और मंत्रियों को बर्खास्त कर सकें?’

भाजपा के साथ संबंधों को लेकर भी किया वार
शेल्टर होम कांड पर राजद ने बीते 18 अगस्त को बिहार के नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा के इस्तीफे की मांग की थी. राजद ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन्हें बर्खास्त करने से डर रहे हैं क्योंकि शर्मा भाजपा से ताल्लुक रखते हैं. पार्टी ने यह भी कहा कि पिछले सप्ताह इस्तीफा देने वाली समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा ‘छोटी मछली’ हैं और ‘बड़ी मछलियों’ को पकड़ने के लिए जांच पर उच्चतम न्यायालय की निगरानी जरूरी है. राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा था, ‘नीतीश कुमार सुरेश शर्मा को बर्खास्त करने से क्यों डर रहे हैं. क्या सिर्फ इसलिए कि वह केंद्र में सत्ता में बैठी भाजपा से ताल्लुक रखते हैं.’ उन्होंने कहा था, ‘सुरेश शर्मा मामले में प्रमुख आरोपी ब्रजेश ठाकुर के करीबी माने जाते हैं. यदि मुख्यमंत्री यह सोचते हैं कि वर्मा के इस्तीफे से मामला निपट गया है तो वह गलत हैं. वह शर्मा को कैबिनेट से हटाने के लिए सरकार को विवश कर देंगे.’

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TISS की रिपोर्ट के बाद मलाला फंड ने 2 एनजीओ का अनुदान रोका
‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज’ (TISS) की सोशल ऑडिट रिपोर्ट से आश्रय गृहों में यौन उत्पीड़न की घटनाएं सामने आने के बाद बिहार की गैर-सरकारी संस्थाओं को विदेशी संस्थाओं से अनुदान मिलने पर रोक लगना शुरू हो गया है. इस रिपोर्ट के बाद ‘मलाला फंड’ नामक संगठन ने बिहार के 2 एनजीओ- ‘सखी’ और ‘नारी गुंजन’ के अनुदान को आज निलंबित करने की बात कही. टीआईएसएस की सोशल ऑडिट से ही बिहार के लगभग सभी आश्रय गृहों में बड़े पैमाने पर यौन शोषण के मामलों का पर्दाफाश हुआ है. ‘मलाला फंड’ के प्रमुख संचार अधिकारी टेलर रॉयल ने एक बयान में कहा, ‘बिहार सरकार को दी टीआईएसएस की रिपोर्ट में बाल यौन शोषण के आरोपों के बारे में पढ़ने के बाद ‘मलाला फंड’ ने आगे की कार्रवाई पूरी होने तक ‘सखी’ और ‘नारी गुंजन’ को दिए जाने वाला अनुदान निलंबित कर दिया है.’ रॉयल ने कहा, ‘मलाला फंड की बाल संरक्षण योजना, बच्चों को दी जाने वाली किसी भी यातना एवं शोषण को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित करती है.’

(इनपुट – एजेंसी)