नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण मामले के संबंध में एक एनजीओ के वित्तीय पहलुओं की जांच शुरू की. यह जानकारी एजेंसी के एक अधिकारी ने दी. उन्होंने बताया कि एनजीओ को सालाना 36 लाख रुपये की रकम मिलती थी. पिछले दो महीने से बारीक परीक्षण के बाद ईडी ने अपराध के वित्तीय पहलुओं की जांच शुरू की. मामला मूल रूप से बालिका गृह में रहने वाली 34 लड़कियों के यौन उत्पीड़न से जुड़ा हुआ है. Also Read - बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या तीन हजार पार, पटना में हैं सबसे अधिक मरीज

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एजेंसी द्वारा एनजीओ संकल्प एवं विकास समिति के कार्यो की जांच की जा रही है. एनजीओ 2013 से बालिका गृह का संचालन कर रहा था. आरोप है कि मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने धोखेबाजी का सहारा लेकर अपने नजदीकी रिश्तेदारों को एनजीओ प्रबंधन का हिस्सा बनाया. ठाकुर एनजीओ के सिर्फ संरक्षक थे, न कि पदाधिकारी. मामला जांच के अधीन होने के कारण एनजीओ के खातों को बंद कर दिया गया है और इसके प्रबंधन निकाय के सदस्यों को किसी संपत्ति को नहीं बेचने का निर्देश दिया गया है.

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बिहार सरकार ने एनजीओ को काली सूची में डाला

राज्य सरकार ने एनजीओ को काली सूची में डाल दिया है. आयकर विभाग भी ठाकुर और उनके एनजीओ की संपत्ति और सरकार द्वारा प्रदत्त 4.5 करोड़ रुपये अनुदान के खर्च के बारे में जांच कर रहा है. बालिकागृह में 41 से से 34 लड़कियों का यौन-उत्पीड़न होने की घटना मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा मई में किए गए एक सामाजिक लेखा परीक्षण में प्रकाश में आई. मामले में 11 लोगों के खिलाफ 31 मई को प्राथमिकी दर्ज की गई, जिनमें ठाकुर भी शामिल हैं. मामले की जांच बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई.