नई दिल्ली. बिहार में हाल में हुई सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं के बाद प्रदेश की सियासत करवट लेती दिखाई दे रही है. हालिया हिंसा की घटनाओं पर सीएम नीतीश कुमार जहां एक तरफ भाजपा के कड़े ‘स्टैंड’ से लड़ रहे हैं तो दूसरी ओर उन्हें लगातार तीखे होते राजद के हमले भी झेलने पड़ रहे हैं. ऐसे में राजनीतिक रूप से सक्रिय इस राज्य में संभावित घटनाओं की आहट सीएम नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री व लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान की दोस्ती के रूप में दिखने लगी है. मिलती-जुलती विचारधाराओं के साथ राजनीति शुरू करने वाले ये दोनों सूरमा आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर हाथ मिला सकते हैं, इसके संकेत मिलने लगे हैं. इन दोनों की दोस्ती एक तरफ जहां सहयोगी लेकिन मजबूत भाजपा पर दबाव बनाने का काम करेगी. वहीं, दूसरी ओर मुस्लिम इलाकों में हिंसात्मक घटनाओं के बाद राजद के बढ़ते प्रभाव को भी साधेगी. Also Read - Corona Virus Bihar: बिहार में नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, सभी शिक्षण संस्‍थान 11 अप्रैल तक रहेंगे बंद, जानिए नई गाइडलाइंस

6 महीने में 4 बार मिल चुके हैं नीतीश और रामविलास
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार सीएम नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की दोस्ती के संकेत इससे भी दिखे हैं कि ये दोनों नेता पिछले छह महीनों में चार बार एक-दूसरे से मिल चुके हैं. लोजपा के एक वरिष्ठ नेता ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘नीतीश कुमार ने महादलित समुदाय बनाकर इसमें से पासवान बिरादरी को हटा दिया था. पासवान समुदाय को दलित वर्ग में रहने दिया गया. लेकिन यह बात अब बीते दिनों की हो गई है. नीतीश और रामविलास के संबंधों में भी परिवर्तन आ गया है. हम लोगों ने नीतीश कुमार से आग्रह किया है कि आगामी 14 अप्रैल को दलित सेना के सम्मेलन में पासवान समुदाय को भी महादलित वर्ग में शामिल करने की घोषणा की जाए.’ टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार सीएम नीतीश कुमार भी दलित सेना के इस सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं. इसी में संभवतः पासवान समुदाय को महादलित वर्ग में रखने की घोषणा की जा सकती है. Also Read - Bihar Politics: क्या सीएम नीतीश कुमार NDA का साथ छोड़ ज्वाइन करेंगे 'महागठबंधन', राबड़ी देवी ने कही ये बड़ी बात

दलित-मुस्लिम वोटों के लिए एकजुट हो रहे नेता
बिहार में पिछले एक साल में राजनीति ने कई करवटें ली हैं. पहले राजग के पूर्व सहयोगी ‘हम’ के नेता व पूर्व सीएम जीतनराम मांझी राजद-नीत महागठबंधन में गए. फिर अररिया लोकसभा सीट के उपचुनाव में राजग प्रत्याशी की हार और उसके बाद रामनवमी पर हुई राज्यव्यापी हिंसात्मक घटनाओं ने रामविलास पासवान और सीएम नीतीश कुमार को चिंता में डाल दिया है. दरअसल, रामविलास पासवान को इस बात का डर है कि हालिया हिंसा की घटनाओं में भाजपा के कुछ नेताओं की ‘संलिप्तता’ से दलित समुदाय में यह संदेश गया है कि राजग गठबंधन इस समुदाय के प्रति उदासीन है. वहीं, सीएम नीतीश कुमार को भी यह भय है कि इन घटनाओं के बाद उनकी पार्टी के हिस्से का मुस्लिम वोट छिटक सकता है. ऐसे में दलित और मुस्लिम वोटों को साधने के लिए नीतीश और रामविलास बिहार में एक अलग मोर्चा बनाने की दिशा में एकजुट हो रहे हैं. इस मोर्चे में रालोसपा के नेता और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के भी शामिल होने की खबर है. क्योंकि वे भी 14 अप्रैल को होने वाले दलित सेना के सम्मेलन में नीतीश कुमार के साथ मंच साझा करने वाले हैं. हालांकि उपेंद्र कुशवाहा को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव खुले तौर पर महागठबंधन में शामिल होने का न्योता दे चुके हैं. यह न्योता कुशवाहा को तब मिला जब वे इलाज के सिलसिले में रांची से दिल्ली एम्स पहुंचे लालू प्रसाद से मिलने अस्पताल गए थे. Also Read - Maharashtra Government: किसानों की सुरक्षा और MSP तय करने के लिए महाराष्ट्र सरकार बनाएगी नया कानून

अलग मोर्चे की बात पर भाजपा-राजद के अपने-अपने तर्क
नीतीश और रामविलास के एक होकर बिहार में अलग मोर्चा बनाने की बात को भाजपा और राजद खारिज कर रहे हैं. प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘रामविलास पासवान ने डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी को भी 14 अप्रैल के दलित सेना सम्मेलन में बुलाया है. बहुत संभव है कि सुशील मोदी इसमें जाएंगे. इसका यह मतलब नहीं है कि रामविलास किसी मोर्चे का गठन कर रहे हैं.’ वहीं, राजद का कहना है कि रामविलास पासवान महागठबंधन का हिस्सा बनने जा रहे हैं. राजद के वरिष्ठ नेता और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा, ‘पासवान और राजद के बीच अंदरूनी स्तर की बातचीत चल रही है. वे जल्द ही महागठबंधन से जुड़ने जा रहे हैं. एनडीए में रहते हुए रामविलास पासवान को घुटन हो रही है. मैंने जब कहा था कि जीतनराम मांझी महागठबंधन में आ रहे हैं, तब भी भाजपा ने इनकार किया था. लेकिन मेरा अनुमान सही हुआ. पासवान के मामले में भी यही होगा.’