नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने मंगलवार को दो टूक कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए महागठबंधन के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो गए हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले को लेकर राजद महागठबंधन के किसी अन्य दलों के दबाव में भी नहीं आएगा. बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने जनादेश का अपमान किया और यहां की जनता नीतीश को कभी माफ नहीं करेगी. Also Read - शराबबंदी वाले बिहार में शराब के अवैध कारोबार को रोकने में नाकाम रहने वाले 4 थानेदार निलंबित

उन्होंने कहा कि जनता को ठगने वाले और 36 घोटालों में शामिल रहने वाले नीतीश की महागठबंधन में कोई जगह नहीं है. अगर नीतीश को महागठबंधन में शामिल कराया जाता है, तो यहां की जनता महागठबंधन को भी माफ नहीं करेगी. तेजस्वी ने बिहार में लचर कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि बिहार में आपराधिक घटनाओं में जबरदस्त वृद्धि हुई है. उन्होंने इसके लिए एक साइकिल रैली निकालने की बात कही और कहा कि इस रैली में राजद के अलावा महागठबंधन में शामिल सभी दलों के लोग रहेंगे. Also Read - बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद अब इस तैयारी में विपक्षी महागठबंधन...

नीतीश ने लालू को किया याद 
दूसरी ओर बिहार सीएम नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) चीफ लालू प्रसाद यादव से फोन पर बात की है. नीतीश ने फोन पर लालू के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली.लालू प्रसाद यादव का मुंबई के एसियन हार्ट इंस्टीट्यूट में ट्रीटमेंट चल रहा है. नीतीश कुमार का लालू यादव को फोन करना बिहार में एक नए सियासी समीकरण का संकेत दे सकता है. जेडीयू-राजद-कांग्रेस महागठबंधन से अलग होने और बीजेपी के साथ सरकार बनाने के बाद नीतीश ने पहली बार लालू से करीबी दिखाई है. वहीं, दूसरी तरफ साल 2019 लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारों पर बीजेपी और जेडीयू में तकरार को देखते हुए भी यह बातचीत महत्वपूर्ण है.

बीजेपी-जेडीयू में रार
बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं. इस पर सीटों के बंटवारे को लेकर बीजेपी और जदयू में काफी बयानबाजी हो रही है. जदयू नेता संजय सिंह ने कहा है कि बीजेपी जल्द से जल्द सीटों का बंटवारा कर ले, नहीं तो पार्टी अकेले ही 40 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे का विवाद जदयू के 25 सीटों पर चुनाव लड़ने के दावे से शुरू हुआ है. वहीं, कल जदयू की तरफ से नया बयान आया. भाजपा सहित बिहार की चार सहयोगी पार्टियों में सीट बंटवारे के लिए जदयू 2015 के राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजों को आधार बनाना चाहता है.

जदयू का मोलभाव
जदयू 2013 तक भाजपा का सहयोगी था. उस वक्त वह राज्य में निर्विवाद रूप से वरिष्ठ गठबंधन साझेदार था और लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में वह हमेशा ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ता था. लोकसभा चुनावों में जदयू 25 और भाजपा 15 सीटों पर चुनाव लड़ती थी. लेकिन 2014 में भाजपा की जोरदार जीत ने समीकरण बदल दिए हैं और राजग में अन्य पार्टियों के प्रवेश का मतलब है कि पुराने समीकरण अब प्रासंगिक नहीं रह गए. यही वजह है कि सीट बंटवारे को लेकर राजग के साझेदारों में अभी बातचीत शुरू नहीं हुई है, लेकिन जदयू ने मोलभाव शुरू कर दिया है.