नई दिल्ली: बिहार में अगले साल विधानसभा(Bihar Asssembly Election) चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में प्रदेश की राजनीति गरमा चुकी है. सभी पार्टियां और उनके नेता एक दूसरे पर बयानबाजी लगातार करने में जुटे हुए हैं. ऐसे में एक नाम इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है. यह नाम है प्रशांत किशोर (Prashant Kishor). प्रशांत किशोर और भाजपा नेता सुशील मोदी (Sushil Kumar Modi) लगातार एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी करते दिख रहे हैं. यही नहीं प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को लेकर भी कई बार सख्ती दिखाई है. हालांकि नीतीश कुमार से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सब ठीक है. बता दें कि इन दिनों बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार, प्रशांत किशोर और सुशील मोदी चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. आशंका जताई जा रही है कि इनके बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है.

गौरतलब है कि जदयू उपाध्यक्ष प्रशांत काफी दिनों से नागरिकता कानून (CAA) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NRC) पर बयान दे रहे हैं. वह पार्टी लाइन से हटकर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं. यही नहीं बीते दिनों किशोर ने ट्वीट कर लिखा- बिहार में नीतीश कुमार का नेतृत्व और JDU की सबसे बड़े दल की भूमिका बिहार की जनता ने तय किया है, किसी दूसरी पार्टी के नेता या शीर्ष नेतृत्व ने नहीं. 2015 में हार के बाद भी परिस्थितिवश उप मुख्यमंत्री बनने वाले सुशील मोदी से राजनीतिक मर्यादा और विचारधारा पर व्याख्यान सुनना सुखद अनुभव है.

बता दें कि इससे पहले पार्टी उपाध्यक्ष ने आगामी विधानसभा चुनाव में जेदयू को भाजपा की तुलना में अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की सलाह दी थी साथ ही सीट बंटवारे का आंकड़ा भी बताया था. उन्होंने अपने ट्वीटी में बताया कि नीतीश कुमार बिहार का चेहरा है. बता दें कि प्रशांत किशोर के ट्वीट पर सुशील मोदी ने पलटवार किया.

उन्होंने ट्वीट कर लिखा- 2020 का विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाना तय है. सीटों के तालमेल का निर्णय दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व समय पर करेगा. कोई समस्या नहीं है. लेकिन जो लोग किसी विचारधारा के तहत नहीं, बल्कि चुनावी डाटा जुटाने और नारे गढ़ने वाली कंपनी चलाते हुए राजनीति में आ गए, वे गठबंधन धर्म के विरुद्ध बयानबाजी कर विरोधी गठबंधन को फायदा पहुंचाने में लगे हैं. एक लाभकारी धंधे में लगा व्यक्ति पहले अपनी सेवाओं के लिए बाजार तैयार करने में लगता है, देशहित की चिंता बाद में करता है.