पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के अवसर पर नए अवतार में दिखेंगे. उन्होंने दहेज प्रथा, बाल विवाह और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जंग की घोषणा की है. नीतीश को लगता है कि बिहार के विकास में सामाजिक पिछड़ापन सबसे बड़ी बाधा है.

नीतीश ने अपनी पार्टी के नेताओं के पहले ही कह दिया है कि वे ऐसी किसी शादी में न जाएं जहां दहेज का लेन-देन हुआ हो. वे बाल विवाह के खिलाफ भी युद्ध छेड़ेंगे. बिहार के लिए बाल विवाह ऐसी समस्या रही है जिससे वह निपटने में सक्षम नहीं रहा है. हाल ही में आए एक रिपोर्ट कहती है कि राज्य में होने वाली सभी शादियों में 39 फिसदी बाल विवाह होते हैं, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा है.

मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान नीतीश ने जाति और समुदाय की परवाह किए बिना महिला आबादी को संगठित किया. अपने पहले कार्यकाल (2005-2010) के दौरान, नीतीश ने छात्राओं को साइकिल और यूनिफॉर्म देने की योजना लाई जो कि एक गेमचेंजर साबित हुआ. इस योजना के वजह से स्कूलों में छात्राओं के दाखिले में बढ़ोतरी भी देखी गई.

नीतीश ने महिलाओं के साथ एक ऐसा संबंध स्थापित किया है जो पहले कोई भी सीएम नहीं कर पाया. दूसरे कार्यकाल (2010-15) में अपनी यात्राओं के दौरान, कई महिलाओं ने नीतीश से हर गांव में शराब दुकान खोलने की इजाजत को लेकर शिकायत की. इसके बाद नीतीश और उनकी पार्टी जेडीयू ने यू-टर्न लिया.

2015 विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादे के अनुसार, नीतीश ने 5 अप्रैल, 2016 को बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू करने की घोषणा की. नीतीश के इस फैसले से महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता और बढ़ गई. 

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सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अपनी लड़ाई में नीतीश नए लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरत पड़ने पर विधायी रास्ते की मदद ले सकते हैं या फिर पार्टी के संविधान में बदलाव कर सकते हैं. नीतीश ने फैसला किया है कि वे अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएंगे.

नीतीश के करीबी और जेडीयू महासचिव संजय झा कहते हैं कि शराबबंदी कानून की तरह वे दहेज और बाल विवाह के खिलाफ कानून को और सख्त बनाएंगे जो इसे हतोत्साह करने का काम करेगा. झा ने कहा कि सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है, जिसमें एक सरकारी अफसर को दहेज लेन-देन को लेकर पद से हटाना और बाल विवाह को बढ़ावा देने पर कारावास की अवधि भी शामिल हैं.

संजय झा ने संकेत दिया कि पार्टी नेताओं द्वारा खर्चीले शादियों और बाल विवाह में शामिल होने पर उन्हें दंडित या फिर दल से बाहर निकाला जा सकता है.