नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की एक सबसे अहम प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) पटरी से उतरने वाली है. ऐसा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार की विफलता की वजह से होने वाला है. जदयू-भाजपा गठबंधन की सरकार की विफलता की वजह से केंद्र सरकार नाराज है. इसी कारण उसने चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए बिहार को कोई नया लक्ष्य नहीं दिया है. इस साल 31 मार्च तक बिहार सरकार ने जो लक्ष्य तय किया था उसे ही वह हासिल करने में पूरी तरह विफल रही है.

इकोनॉमिक टाइम्स अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र की मोदी सरकार का लक्ष्य इस साल 31 दिसंबर तक इस योजना के तहत एक करोड़ ग्रामीण आवास बनवाने की है. लेकिन इस पूरी योजना को बिहार सरकार पटरी से उतारने पर उतारू है. राज्य में अब तक लक्ष्य का केवल तीन फीसदी ही आवास का निर्माण हो सका है. राज्य सरकार को कुल 11.76 लाख आवास बनवाने थे लेकिन राज्य में अब तक केवल 32,530 आवास ही बने हैं.

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राज्य सरकार ने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाने के लिए रेत की भारी कमी को जिम्मेवार ठहराया है. हालांकि राज्य सरकार ने कहा है कि अब यह समस्या खत्म हो गई है और राज्य सरकार ने हर माह 1.22 लाख आवास बनवाने की बात कही है. मार्च में हुई एक बैठक में केंद्र सरकार ने कहा था कि दो अप्रैल 2018 तक केवल 11,561 घरों का ही निर्माण हो सका है, जबकि लक्ष्य 11.76 लाख घरों के निर्माण का है. इसमें से चार लाख घरों का निर्माण मार्च 2018 तक पूरा करना था. आवास निर्माण में नीतीश सरकार की इस विफलता से चिंतित केंद्र सरकार ने 2018-19 के लिए राज्य को कोई नया लक्ष्य नहीं दिया है. मार्च की बैठक में नीतीश सरकार ने 12 अप्रैल तक 50 हजार घरों के निर्माण कार्य को पूरा करने की बात कही थी लेकिन वह उस लक्ष्य को भी हासिल नहीं कर सकी.