पटना. लोकसभा चुनाव में अभी करीब एक साल बाकी है, लेकिन बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में नेतृत्व के ‘चेहरे’ और ‘सीटों’ को लेकर अभी से टकराव शुरू हो गया है. राजग घटक दलों में शामिल सभी पार्टियां अधिक से अधिक सीटों पर अपनी दावेदारी कर रही हैं. वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल (युनाइटेड) राज्य में खुद को ‘बड़े भाई’ के रूप में पेश कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर दबाव बना रही है. ऐसे में सत्तारूढ़ गठबंधन के दलों की आपसी खींचातानी से प्रदेश की सियासत में रोज-रोज नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं. यह रोचक सवाल है कि आखिरकार बिहार की कुल 40 लोकसभा सीटों पर राजग के चारों दलों में से किसको कितनी सीटें मिलेंगी. Also Read - पश्चिम बंगाल में बोले जेपी नड्डा, बहुत जल्द लागू होगा नागरिकता संशोधन कानून

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2015 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा से ज्यादा सीटें लेकर आने वाली पार्टी जदयू, आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर खुद को बिहार में बड़े भाई को तौर पर पेश कर रही है. इसलिए पार्टी के नेता लगातार नीतीश कुमार को 2019 के लोकसभा चुनाव में राजग का चेहरा बनाने की मांग कर रहे हैं. जदयू के वरिष्ठ नेता के. सी. त्यागी कहते हैं, ‘सीटों के बंटवारे को लेकर कोई समस्या नहीं है. बिहार में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं. ऐसे में इससे कौन इंकार कर सकता है कि बिहार में नीतीश ही राजग के चेहरा हैं.’ उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा में राजग घटक दलों में जद (यू) सबसे बड़ी पार्टी है. लोकसभा चुनाव में सीटों को लेकर अभी कोई बातचीत शुरू नहीं हुई है. हमें उम्मीद है कि जब यह शुरू होगी तो इसका सकारात्मक समाधान होगा. त्यागी के अलावा कई और जदयू नेताओं ने भी नीतीश कुमार को लोकसभा चुनाव में राजग का चेहरा बनाने की मांग की है.

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लोजपा को नीतीश से गुरेज, अपनी सीटों पर दावा

भाजपा और जदयू के बीच चेहरे की जंग और सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर राजग के दूसरे दल भी नजर टिकाए हुए हैं. इन क्षेत्रीय दलों को राजग में रहना तो मंजूर है, लेकिन उन्हें नीतीश कुमार के ‘चेहरे’ से गुरेज है और वे अपनी जीती हुई सीटों को दोबारा लेने के दावे भी कर रहे हैं. इसलिए केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के नेतृत्व वाली पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के नेता पशुपति कुमार पारस ने स्पष्ट कहा कि जीती हुई सीटें छोड़ने का प्रश्न ही नहीं हैं. उन्होंने लोकसभा चुनाव में नेतृत्व को लेकर पूछे गए प्रश्न के जवाब में कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. लोजपा प्रमुख रामविलास के पुत्र और सांसद चिराग पासवान ने लोकसभा चुनाव में नीतीश के नेतृत्व को नकारते हुए कहते हैं कि राजग की तरफ से लोकसभा का चुनाव नरेंद्र मोदी के नाम पर ही लड़ा जाएगा. विधानसभा चुनाव का चेहरा नीतीश कुमार हो सकते हैं. चिराग ने कहा, ‘नेतृत्व को लेकर राजनीति की जा रही है.’ उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, ‘बिहार में चुनाव का चेहरा सुशील मोदी और रामविलास पासवान क्यों नहीं हो सकते?’

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भाजपा दे रही रणनीतिक जवाब, आज की बैठक अहम

इस बीच, लोकसभा चुनाव में नीतीश या मोदी के राजग का चेहरा होने के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेता रणनीतिक जवाब दे रहे हैं. पार्टी के नेताओं को आज शाम होने वाली राजग के सहयोगी दलों की बैठक का इंतजार है. लोकसभा चुनाव से एक साल पहले राजग की यह बैठक, गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच आपसी तालमेल के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है. भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सधे हुए अंदाज में कहते हैं कि राजग में कोई परेशानी नहीं हैं. गुरुवार शाम को भाजपा द्वारा भोज का आयोजन किया गया है जिसमें सभी घटक दल के नेता शामिल होंगे. उन्होंने कहा, ‘दल मिल गए हैं तो दिल मिलने में भी परेशानी नहीं है. डबल इंजन की सरकार बिहार में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों के चेहरे पर जनसमर्थन मांगेगी. सीटों के तालमेल में भी कोई मुश्किल नहीं होगी.’

संगठन में बड़ी लेकिन अकेले में कमजोर पड़ जाती है जदयू

इसमें कोई शक नहीं कि बिहार में राजग की पहली पारी में जदयू बड़े भाई की भूमिका में रही है. वर्ष 2009 में जदयू और भाजपा ने साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा था, उस दौरान बिहार की कुल 40 लोकसभा सीटों में से जदयू ने 25 तो भाजपा ने 15 सीटों पर चुनाव लड़ा था. वर्ष 2014 में परिस्थितियां बदल गई. जदयू राजग से अलग होकर चुनाव मैदान में उतरी और उसे मात्र दो सीटों पर ही संतोष करना पड़ा जबकि उस चुनाव में भाजपा नेतृत्व वाली राजग ने 31 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी. राजनीति के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद दत्त का मानना है कि जदयू इन बयानों से राजग में दबाव बनाने की कोशिश कर रही है. जदयू 2009 के मुकाबले कमजोर हुई है. ऐसे में यह दबाव स्वाभाविक है.

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जदयू पहले की तरह नहीं, भाजपा भी हुई मजबूत

बिहार की सियासत पर गहरी नजर रखने वाले कहते हैं कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जदयू और भाजपा की आपसी खींचातानी के मद्देनजर कहते हैं कि परिस्थितियां बदल गई हैं. खासकर भाजपा के ऊपर जदयू के तरफ से दबाव बनाए जाने पर प्रमोद दत्त स्पष्ट कहते हैं, ‘जदयू पहले की तरह मजबूत नहीं है और भाजपा पहले की तरह कमजोर नहीं है, जब भाजपा जदयू के पीछे-पीछे घूमती थी. वर्तमान परिस्थिति में जदयू को भी भाजपा की जरूरत है और भाजपा को भी जदयू की आवश्यकता है. दोनों दल पुराने गठबंधन सहयोगी रहे हैं. ऐसे में वे अवश्य कोई रास्ता निकाल लेंगे.’ दत्त कहते हैं कि जदयू इस दबाव के जरिए न केवल आगामी लोकसभा चुनाव में सम्मानजनक सीटों को हासिल करने के फिराक में है बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में भी है. बहरहाल, गुरुवार की शाम राजग के ‘मित्रता भोज’ पर सभी की निगाहें टिकी हैं, जिसमें राजग के सभी घटक दलों को शामिल होना है.

(इनपुट – एजेंसी)