पटना: बिहार में सत्ताधारी जनता दल युनाइटेड (JDU) के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर (पीके) इन दिनों बिहार की सियासत में सबसे चर्चित चेहरा बने हुए हैं. नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के मुद्दे पर पार्टी के फैसले के विरोध में अपनी राय रखने वाले किशोर भाजपा के वरिष्ठ नेता और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के खिलाफ बयान देने के बाद भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आंखों के तारा बने हुए हैं. Also Read - केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल ने ऑक्‍सीजन की मांग पर व्‍यक्ति को 'दो थप्पड़' वाले Viral Video के बाद शेयर किया ये वीडियो

बिहार की सियासत में अब कहा जाने लगा है कि पीके नीतीश की मजबूरी हैं, क्योंकि उन्हीं के जरिए नीतीश कई रणनीति पर काम कर रहे हैं. कहा जाता है कि चुनावी रणनीतिकार के रूप में चर्चित किशोर को तो कई नीतीश कुमार मिल सकते हैं, मगर नीतीश के लिए पीके एक ही हैं. सूत्रों का कहना है कि सीएए व राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) पर शांत रहना जदयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है. संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) के समर्थन के बावजूद एनआरसी के विरोध में खड़ी जदयू आज भी भाजपा की सहयोगी बनी हुई है. Also Read - Bihar Lockdown Latest Update: क्या बिहार में भी लॉकडाउन की आहट? 12 हजार से ज्यादा नए केस और 51 की मौत

जदयू के एक नेता ने कहा, “जदयू की धर्मनिरपेक्ष छवि को सीएए के समर्थन के साथ गंभीर रूप से खतरा था. पार्टी राजद और कांग्रेस को बिहार में 17 फीसदी मुस्लिम वोटों का एकमात्र दावेदार बनने का मौका नहीं दे सकती.” राजनीतिक जानकारों के अनुसार, पीके एक कुशल रणनीतिकार माने जाते हैं, जिसे किशोर ने साबित भी किया है, जिसका लाभ नीतीश उठाना चाहते है. इसके अलावा पीके के संबंध सभी दलों के साथ रहे हैं. नीतीश को मालूम है कि जब भी उन्हें भाजपा से अलग होकर वैकल्पिक राजनीति की जरूरत होगी, तब पीके के उन्हीं संबधों की खास जरूरत होगी, ऐसे में पीके नीतीश की जरूरत बने हुए हैं. Also Read - West Bengal Assembly Election Live Updates: बंगाल में छठे चरण का मतदान जारी, दोपहर 1.30 बजे तक 57.30% वोटिंग

प्रशांत किशोर नीतीश को भी जदयू की ‘धर्मनिरपेक्ष छवि’ की याद दिलाते रहे हैं. पीके के अलावा पवन वर्मा और गुलाम रसूल बलयावी ने भी सीएए का समर्थन करने को लेकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बयान दे चुके हैं, पार्टी नेतृत्व ने फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की.

(इनपुट-आईएएनएस)